
◆ सरकारी जमीन को निजी बताकर हुआ व्यावसायिक इस्तेमाल, अब कार्रवाई की तैयारी।
प्रवाह ब्यूरो
संभल। छह दशक से फाइलों और अदालती प्रक्रियाओं में उलझा करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की 38 बीघा सरकारी जमीन का मामला अब फिर चर्चा में आ गया है। संभल-मुरादाबाद हाईवे पर स्थित इस बेशकीमती भूमि को कथित तौर पर निजी संपत्ति के रूप में दर्ज कर उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। अब लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद जमीन को दोबारा राज्य सरकार और ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया है।
रविवार को जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने गांव तख्त गोसाईं पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने करीब डेढ़ घंटे तक मामले की जानकारी जुटाई।

डीएम ने बताया कि यह भूमि वर्ष 1954 में नगर पालिका परिषद संभल को केवल प्रबंधन के लिए दी गई थी, लेकिन वर्ष 1967 में कथित तौर पर इसका पट्टा कुछ लोगों को दे दिया गया, जबकि नगर पालिका के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं था। बाद में वर्ष 1991 और 1992 में अदालतों ने कब्जाधारियों को अवैध बताते हुए जमीन को सरकारी घोषित कर दिया।
हालांकि वर्ष 2008 में तत्कालीन डीडीसी द्वारा विवादित आदेश जारी कर इस भूमि को निजी खातेदारों के नाम दर्ज कर दिया गया। हाल ही में पूरे मामले की दोबारा जांच कराई गई, जिसमें जमीन को सरकारी ‘नवीन परती’ भूमि पाया गया।

इसके बाद डीडीसी कोर्ट में पुनर्स्थापना याचिका दायर की गई और सुनवाई के बाद फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आया। अब खतौनी से निजी नाम हटाकर भूमि को फिर से राज्य सरकार और ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया है।
जहां अब प्रशासन ने मामले में तत्कालीन अधिकारियों, संबंधित कर्मचारियों, बैनामा कराने वाले व्यक्तियों और मूल पट्टेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और विभागीय कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।