◆ बोले- सुधर जाओ, वरना एक ही दिन में 150 अधिकारियों-कर्मचारियों को करूंगा निलंबित।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर मुख्यमंत्री ने सख्त तेवर दिखाए हैं। मंगलवार देर रात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची तैयार की जा रही है। यदि विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई नहीं करेंगे तो सरकार सीधे कठोर कदम उठाएगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “जरूरत पड़ी तो एक ही दिन में 150 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करूंगा।” योगी ने जनता दर्शन, सीएम हेल्पलाइन और आईजीआरएस पोर्टल की शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। विशेष रूप से राजस्व और पुलिस विभाग से जुड़ी शिकायतों की खराब स्थिति पर उन्होंने नाराजगी जताई। बैठक में गाजीपुर के एक गुमटी संचालक के 1.20 लाख रुपये के बिजली बिल और उसके बाद हुई दुखद घटना का भी जिक्र हुआ। मुख्यमंत्री ने इस मामले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों पर तत्काल मुकदमा दर्ज करने और गिरफ्तारी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे भविष्य में कोई भी अधिकारी इस तरह की गलती करने की हिम्मत न कर सके। जहां मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट था — भ्रष्टाचार पर अब सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि सीधी और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
◆ तीन नामों के पैनल में योगी सरकार ने राजीव कृष्ण पर जताया भरोसा, DGP पद के लिए दी मंजूरी।
◆ 4 साल के लंबे इंतजार के बाद, स्थायी नेतृत्व के साथ नई दिशा में दिखेगी यूपी पुलिस।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश को करीब चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अपना नया स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को प्रदेश का नया पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया गया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा भेजे गए पैनल पर मंथन के बाद मुख्यमंत्री ने उनके नाम को अंतिम मंजूरी दे दी है। गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के मूल निवासी राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून 1969 को हुआ था। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया। वह 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और 15 सितंबर 1991 को सेवा में नियुक्त हुए थे।
अपने 35 वर्षों के शानदार पुलिस करियर में राजीव कृष्ण ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2007 में उन्हें पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG), 2010 में पुलिस महानिरीक्षक (IG), 2016 में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) और 1 फरवरी 2024 को पुलिस महानिदेशक (DGP) रैंक में पदोन्नत किया गया था। उनकी प्रशासनिक दक्षता और कानून-व्यवस्था पर मजबूत पकड़ के चलते उन्हें प्रदेश की पुलिस व्यवस्था का सर्वोच्च दायित्व सौंपा गया है।
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों—रेणुका मिश्रा (1990 बैच), पियूष आनंद (1990 बैच) और राजीव कृष्ण (1991 बैच)—के नामों का पैनल राज्य सरकार को भेजा था। इनमें से राजीव कृष्ण के नाम पर अंतिम मुहर लगी और उनकी नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी स्थायी डीजीपी को न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल दिया जाना आवश्यक है। राजीव कृष्ण जून 2029 में सेवानिवृत्त होंगे, ऐसे में उन्हें प्रदेश के पुलिस मुखिया के रूप में लंबा और स्थिर कार्यकाल मिलने की संभावना है। गौरतलब है कि 11 मई 2022 को तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश में लगातार कार्यवाहक डीजीपी ही नियुक्त किए जाते रहे। ऐसे में राजीव कृष्ण की नियुक्ति से प्रदेश पुलिस को एक स्थायी नेतृत्व मिला है, जिससे कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
◆ कहा– संख्या ज्यादा है तो फिर कंट्रोल क्यों नहीं करते?
◆ बोले- बरेली में हाथ आजमाने वालों ने ताकत भी देख ली।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। बकरीद से पहले उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज को लेकर यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने ने सख्त संदेश दिया है। सोमवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में सड़कों पर नमाज की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नमाज तय स्थानों पर ही पढ़ी जाए और अगर संख्या अधिक हो तो लोग शिफ्ट में नमाज अदा करें। सीएम योगी ने कहा, “हम नमाज का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन सड़क पर अराजकता और यातायात बाधित करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। सड़कें आम जनता के आवागमन के लिए हैं, धार्मिक भीड़ जुटाने के लिए नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि उनसे अक्सर पूछा जाता है कि क्या यूपी में सड़कों पर नमाज होती है? इस पर उनका जवाब होता है- “कतई नहीं।” योगी ने कहा कि किसी को भी ट्रैफिक बाधित करने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने का अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर लोग शांति और नियमों के तहत व्यवस्था मानेंगे तो ठीक है, लेकिन कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। योगी ने आगे कहा, “उन लोगों ने मुझसे कहा कि साहब कैसे होगा, हमारी संख्या ज्यादा है। हमने कहा- तुम्हारे घर में रहने की जगह नहीं है, तो संख्या कंट्रोल कर लो। सामर्थ्य नहीं है, तो क्यों बेकार में संख्या बढ़ाई जा रही है? सभी को सिस्टम से रहना होगा। सभी को कानून का राज मानना होगा।” साथ ही सीएम योगी ने बरेली में हुए बवाल का भी जिक्र करते हुए कहा- बरेली में भी लोगों ने हाथ आजमाया था, ताकत भी देख ली। कानून सभी के लिए बराबर है। किसी को भी सड़क जाम करने या अव्यवस्था फैलाने की छूट नहीं दी जाएगी। दरअसल, यूपी में सितंबर 2025 में आई लव मोहम्मद को लेकर विवाद हुआ था। बरेली में मुस्लिम नेता मौलाना तौकीर रजा ने नमाज के बाद धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया था। पुलिस ने रोका तो पथराव हो गया था। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। सीएम योगी आदित्यनाथ की नवाज पर दिए गए कुछ बयान इस प्रकार हैं…
योगी ने कहा- यूपी में पहले महिलाएं दिन में भी बाहर निकलने से डरती थीं। अब वे नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं। सुरक्षित घर लौट रही हैं। अब कोई बेटी से छेड़खानी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा- यूपी अब ‘बीमारू राज्य’ नहीं, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन चुका है। पिछले 6 साल से यूपी लगातार रेवेन्यू सरप्लस में है। अब प्रदेश को किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। यूपी के पास कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं की ताकत जैसी अपार संभावनाएं हैं। सरकार सभी 75 जिलों के संतुलित विकास पर काम कर रही है। सीएम योगी ने हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सड़कों पर नमाज का मुद्दा उठाया था। उन्होंने बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि दीदी सड़कों पर नमाज पढ़वाती हैं और हिंदू त्योहारों पर पाबंदी लगाती हैं। यूपी में कोई सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ सकता। सड़कें यातायात के लिए हैं, नमाज के लिए नहीं। नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा।अवगत रहे कि योगी सरकार ने 2022-23 में सड़कों पर नमाज पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। आदेश दिया कि ईद, अलविदा जुमा या किसी भी अन्य दिन सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। धार्मिक कार्यक्रम केवल ईदगाह, मस्जिदों या निर्धारित धार्मिक स्थलों के अंदर ही होने चाहिए। पढ़िए! योगी के बयान बाद अब तक प्रदेश में किसने क्या कहा…
◆ मंत्री राजभर का बड़ा दावा- तैयारियां पूरी समय, इस तारीख तक संपन्न हो जायेंगें पंचायत चुनाव।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा बयान देते हुए साफ किया है कि पंचायत चुनाव 12 जुलाई तक संपन्न करा लिए जाएंगे। राजभर ने बताया कि चुनाव की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। जिलों में मतपत्र छप चुके हैं और 15 अप्रैल तक मतदाता सूची का प्रकाशन भी कर दिया जाएगा। इसके साथ ही सीटों का आरक्षण जल्द तय होगा और यह प्रक्रिया चक्रानुसार पूरी की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव पुरानी व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे और इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन होगा।
ओबीसी आरक्षण को लेकर भी सरकार का रुख साफ है। राजभर के अनुसार 2011 की जनगणना के आधार पर ही आरक्षण लागू होगा, किसी नई गणना की जरूरत नहीं होगी। साथ ही आगामी कैबिनेट बैठक में ओबीसी आयोग के गठन पर भी मुहर लग सकती है। इधर, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चुनाव में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या वह संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव करा पाएगी। यह सुनवाई अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन की जनहित याचिका पर हुई, जिसमें समयबद्ध कार्यक्रम तय करने की मांग की गई है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि 15 अप्रैल को मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद क्या 26 मई तक चुनाव संभव हैं, क्योंकि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल इसी तारीख को समाप्त हो रहा है। अगर समय पर चुनाव नहीं हुए, तो प्रशासकों की नियुक्ति करनी पड़ सकती है। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पहले कहा था कि फिलहाल पंचायत चुनाव समय पर कराना मुश्किल नजर आ रहा है। उन्होंने बताया था कि सरकार की मशीनरी इस समय SIR, जाति जनगणना और मकान गणना जैसे बड़े कार्यों में व्यस्त है। अब देखना होगा कि सरकार और चुनाव आयोग तय समयसीमा के भीतर पंचायत चुनाव कराने में कितनी सफल होती है।
◆ थानों और आउटपोस्ट में तैनाती को लेकर डीजीपी राजीव कृष्ण के सख्त निर्देश।
◆ जनशिकायतों के निस्तारण में कमी पर सख्ती, समीक्षा के बाद लिया गया ये फैसला।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब थानों और चौकियों में पुलिसकर्मियों की तैनाती का आधार जनशिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण होगा। इस संबंध में डीजीपी राजीव कृष्ण ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि जिलों में की जा रही समीक्षा के दौरान जनशिकायतों के निस्तारण में कई स्थानों पर कमी पाई गई है। इसे गंभीरता से लेते हुए निर्णय लिया गया है कि अब थानों और आउटपोस्ट में तैनात पुलिसकर्मियों के कार्य प्रदर्शन का आकलन भी जनशिकायतों के समाधान के आधार पर किया जाएगा। दरअसल, पिछले कुछ समय से समीक्षा के क्रम में थाना और चौकियों के स्तर पर जनशिकायतों की सुनवाई में उदासीनता का मामले सामने आ रहे थे। अब ऐसे जिलों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। डीजीपी राजीव कृष्ण के स्तर पर हुई समीक्षा के क्रम में जिलास्तरीय अधिकारियों को साफ किया गया कि आम लोगों की समस्याओं को हर हाल में दूर किया जाना चाहिए। जनशिकायतों का प्रभावी निस्तारण होना चाहिए। इसी आधार पर पुलिस अधिकारियों की थाने और चौकियों में तैनाती मिलनी चाहिए।
जनशिकायतों के निस्तारण का मामला डीजीपी राजीव कृष्ण की अपराध समीक्षा बैठक में उठा। इस दौरान जनशिकायतों के निस्तारण में पीछे रहे जिलों के पुलिस अधिकारियों को डीजीपी ने कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण के लिए थानों-चौकियों पर तैनाती के आधार के रूप में भी शामिल किया जाए। मतलब, थाना-चौकियों पर जनशिकायतों को निस्तारित करने में सफलता के आधार पर पुलिस अधिकारियों की रेटिंग तय होगी। इसी आधार पर उन्हें थाना-चौकियों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। डीजीपी ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपराध समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी जिलों को जनशिकायतों में 40 फीसदी कमी लाने का लक्ष्य दिया था। समीक्षा में पाया गया कि संभल, फिरोजाबाद और इटावा में जनशिकायतों में करीब 70 फीसदी की कमी दर्ज की गई। डीजीपी ने इन जिलों की प्रशंसा की। प्रदेश के 15 जिलों में जनशिकायतों में 40 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई है। जबकि लखनऊ, कानपुर और वाराणसी समेत 48 जिलों में जनशिकायतों में 30 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई। डीजीपी ने इन जिलों में जनसुनवाई को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। साथ ही, जिन जिलों में जनशिकायतों की प्रभावी सुनवाई नहीं हो पाई है, वहां तत्काल स्थिति में सुधार का निर्देश दिया गया। साथ ही डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे नियमित रूप से जनशिकायतों की समीक्षा करें और लंबित मामलों का शीघ्र समाधान कराएं, ताकि पुलिस व्यवस्था के प्रति आमजन का विश्वास मजबूत हो सके।
◆ शिक्षामित्रों को 18 हजार तो अनुदेशकों को 17 हजार रुपए प्रतिमाह का ऐलान।
◆ नए शैक्षणिक सत्र से मिलेगा बढ़ा मानदेय, शिक्षामित्रों में खुशी की लहर।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। यूपी विधानसभा के बजट सत्र में सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान किया है। जहां सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय में वृद्धि कर दी है। सरकार के फैसले के अनुसार अब शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपए तथा अनुदेशकों को 17 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। बताया गया है कि बढ़ा हुआ मानदेय नए शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। इस निर्णय के बाद प्रदेश भर के शिक्षामित्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों और अनुदेशकों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षामित्रों व अनुदेशकों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण और बेहतर होगा। अभी मौजूदा वक्त में शिक्षा मित्रों को लगभग 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। नए फैसले के बाद उन्हें सीधे 8,000 रुपये की बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा। इसी तरह, अनुदेशकों को अब तक करीब 9,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता रहा है, जिसे बढ़ाकर 17,000 रुपये किया गया है। यानी उन्हें भी 8,000 रुपये तक की वृद्धि का लाभ मिलेगा। प्रदेश में करीब 1.50 लाख से अधिक शिक्षामित्र कार्यरत हैं साथ ही लगभग 25,000 अनुदेशक अलग-अलग परिषदीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। इस फैसले से करीब 1.75 लाख कर्मियों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। शिक्षा मित्र और अनुदेशक संगठन लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री की इस घोषणा को इन वर्गों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
◆ अब हर पन्ने पर लिखना होगा अनुक्रमांक और कॉपी नंबर, नकल पर कसेगा शिकंजा।
◆ कॉपी में नाम, चिह्न या पहचान के अलावा रखे रूपये तो सील होगी कॉपी।
◆ 8 हजार परीक्षा केंद्रों पर बड़ी तैयारी, 53 लाख से अधिक परीक्षार्थियों की इस बार ए4 साइज में लंबवत होगी उत्तर पुस्तिका।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। एशिया के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में गिने जाने वाले यूपी बोर्ड परीक्षा आज से शुरू हो रही हैं। जिसमें इस बार कई अहम बदलाव किए गए हैं। इस साल करीब 53 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे, जिसके लिए 75 जिलों में कुल 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए है। नकल पर सख्ती और पारदर्शिता के लिए बोर्ड ने नई व्यवस्था लागू की है। नकलविहीन परीक्षा के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग और कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इसमें से कई बदलावों से छात्रों का स्ट्रेस काफी हद तक कम भी होने वाला है। परीक्षाएं पूरे राज्य में पेन-एंड-पेपर मोड में होंगी। सुबह का सेशन सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक चलेगा, जबकि दोपहर का सेशन दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक होगा। क्लास 10 और 12 दोनों के लिए पहली परीक्षा हिंदी की है। इन नियमों के तहत महिला स्टाफ की तैनाती से लेकर जांच के दौरान जूते मोजे उतारने से लेकर कई सारे अहम निर्देश जारी किए गए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा में जांच के दौरान छात्रों के साथ खराब व्यवहार के कई मामले सामने आ चुके हैं। जिसके चलते ही परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी और ऑडियो रिकॉर्डिंग के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बोर्ड ने बताया कि इस बार जांच के दौरान छात्रों को जूते और मोजे नहीं उतारने होंगे। बोर्ड ने नकल रोकने के लिए ये फैसला लिया है। अतिसंवेदनशील कैटेगरी में पड़ने वाले केंद्रों की दो बार जांच की जाएगी। वहीं 20 एग्जाम सेंटर्स में जैमर लगाया जाएगा। पहले कॉपियां आड़ी होती थीं अब उन्हें लंबवत कर दिया गया है। साथ ही हर आंसर शीट पर यूनिक नंबर और सुरक्षा चिह्न भी लगाए गए हैं। हर पेज पर रोल नंबर और कॉपी की संख्या लिखना जरूरी है। कॉपी में नाम, चिह्न या फिर पहचान लिखना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। एग्जाम कॉपी में पैसे मिलने पर आंसर शीट को सील कर दिया जाएगा। साथ ही परीक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई भी हो सकती है। बरामद राशि को सरकारी ट्रेजरी में जमा किया जाएगा। घटना की रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक को भेजी जाएगी। बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि एग्जाम से पहले वे सभी स्टूडेंट्स को ये सभी नियम बता दें। उत्तर पुस्तिकाओं में चार रंगों में क्रमांक, परिषद का लोगो और UPMSP की सूक्ष्म अंकन जैसा विशेष सुरक्षा फीचर्स जोड़ा गया है, जिससे अदला-बदली रोक जा सके। इस साल पहली बार परीक्षा की ऑनलाइन मॉनीटरिंग भी की जाएगी। इसके अलावा, ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024’ के तहत परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होगी। राज्य मंत्री गुलाब देवी ने लखनऊ में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया। हर परीक्षा कक्ष में दो वॉयस रिकॉर्डर वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के साथ राउटर, डीवीआर और हाई-स्पीड इंटरनेट भी उपलब्ध है। परीक्षा की संपूर्ण लाइव मॉनिटरिंग वेबकास्टिंग के माध्यम से होगी। इन केन्द्रों पर एसटीएफ और स्थानीय टीम लगातार निगरानी करेगी। परीक्षा के संबंध में स्टूडेंट्स और पैरेंट्स को अगर कोई समस्या आती है तो मदद के लिए लखनऊ में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम बनाए गए और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं- टोल-फ्री नंबर 18001806607 और 18001806608 जबकि माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के टोल-फ्री नंबर 18001805310 और 18001805312 भी सक्रिय रहेंगे। साथ ही शिकायत या सुझाव ईमेल, फेसबुक, एक्स (X) और व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं। प्रयागराज मुख्यालय के साथ ही वाराणसी, मेरठ, बरेली और गोरखपुर के क्षेत्रीय कार्यालयों में भी कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं, जिससे परीक्षार्थियों को हर जगह मदद मिल सके।
◆ यूपी बजट में महिलाओं और बेटियों पर विशेष फोकस, शिक्षा, सुरक्षा और स्वावलंबन पर दिखी प्राथमिकता।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। प्रदेश की योगी सरकार ने लड़कियों की शादी कराने के लिए दिए जाने वाले अनुदान की राशि दोगुना करने की घोषणा कर दी है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस योजना को लागू किया था। जहां यूपी के इस बजट में महिलाओं और लड़कियों पर फोकस किया गया है। जिसमें गरीब परिवार की बेटियों को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत अनुदान राशि दिए जाने का प्रावधान है। अब योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में बडी राशि का प्रावधान किया है। यूपी विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सभी वर्ग की लड़कियों के विवाह के लिए अनुदान राशि बढ़ाए जाने की घोषणा की। इस योजना के तहत पहले 51,000 रुपये की राशि अनुदान के तौर पर मिलती थी। यूपी बजट 2026 में इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। बजट में योजना के लिए 750 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। सीएम योगी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस योजना के जरिए गरीब परिवारों को फोकस किया है। गरीब परिवारों में बेटी की शादी एक बड़ी चुनौती बनती है। ऐसे में अगर सरकार की ओर से एक लाख रुपये की आर्थिक मदद की जाती है तो यह उनके लिए बड़ी राहत होगी। यूपी चुनाव 2027 से पहले सभी वर्ग के लोगों के लिए बजट में किए गए इस प्रावधान से बड़े स्तर पर लोगों को जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
◆ बोले- SIR पूरा होते ही चुनावी तारीखों का होगा औपचारिक ऐलान।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। यूपी के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा इशारा दिया है। राजभर के बयान के बाद पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों और आम जनता को चुनाव टलने की आसार वाली चिंता से मुक्ति मिल गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे। सुल्तानपुर दौरे के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे पंचायत चुनाव को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि पंचायत चुनाव में किसी तरह की देरी नहीं होगी। सरकार पूरी तैयारी के साथ पंचायत चुनाव कराने जा रही है। आने वाले दिनों में चुनाव को लेकर औपचारिक घोषणाएं भी हो सकती हैं। इस विषय पर राजभर ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से पंचायत चुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा की है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि फिलहाल प्रदेश के अधिकारी और कर्मचारी ‘एसआईआर’ कार्यक्रम में लगे हुए हैं। जैसे ही यह काम पूरा होगा, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। राजभर के अनुसार SIR का काम 6 फरवरी तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद प्रशासन पूरी तरह से पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुट जाएगा। उन्होंने कहा कि SIR पूरा होते ही चुनाव की तारीखों को लेकर औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा। बता दें कि पिछले कुछ समय से पंचायत चुनाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कहीं कहा जा रहा था कि चुनाव टल सकते हैं, तो कहीं तारीख आगे बढ़ने की बातें हो रही थीं। ओम प्रकाश राजभर के इस बयान के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार संविधान और नियमों के अनुसार ससमय चुनाव कराएगी।
◆ योगी सरकार का आदेश, पहले 14 जनवरी को रखा था ऑप्शनल।
प्रवाह ब्यूरो लखनऊ। मकर संक्रांति को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे लाखों कर्मचारियों, छात्रों और दफ्तरों की योजना अब नए सिरे से बनेगी। बता दें कि प्रदेश की योगी सरकार ने मकर संक्रांति के अवकाश में बदलाव किया है। पहले सरकार ने 14 जनवरी 2026 को निर्बंधित (वैकल्पिक) अवकाश घोषित किया था, लेकिन अब इसकी जगह 15 जनवरी 2026, गुरुवार को सार्वजनिक अवकाश रहेगा। जिसके लिए शासन ने संशोधित आदेश भी जारी कर दिया है। नए आदेश के मुताबिक अब 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) को प्रदेशभर में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इससे पहले यह अवकाश 14 जनवरी 2026 (बुधवार) के लिए घोषित किया गया था।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी की रात पड़ रहा है, जबकि उसका धार्मिक और पारंपरिक प्रभाव 15 जनवरी को माना जा रहा है। इसी कारण शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि पहले घोषित 14 जनवरी के अवकाश के स्थान पर 15 जनवरी को अवकाश रखा जाए। संशोधित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 के अंतर्गत सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि इस दिन बैंक, सरकारी कार्यालय और अधिकतर सार्वजनिक संस्थान बंद रहेंगे। साथ ही मकर संक्रांति का सार्वजनिक अवकाश घोषित होने के बाद 2026 में 26 राजकीय अवकाश हो जाएंगे। पहले जारी सूची के अनुसार 25 सार्वजनिक अवकाश थे। अब मकर संक्रांति की छुट्टी भी घोषित होने के बाद निर्बंधित (ऑप्शनल) अवकाश 31 बचेंगे। गणतंत्र दिवस और होलिका दहन सोमवार पड़ रहे हैं, इनसे पहले शनिवार और रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने से दफ्तरों में लगातार तीन-तीन दिन छुटि्टयां रहेंगी।