
◆ एक क्लिक में खुलेंगे संभल के 68 तीर्थों और ऐतिहासिक धरोहरों के द्वार।
◆ इतिहास के पन्नों में दर्ज संभल के गौरव को अब वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी।
प्रवाह ब्यूरो
संभल।सदियों पुरानी धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक धरोहरों को अपने भीतर समेटे संभल अब पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान बनाने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर संभल को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल की पहल पर जिले के लिए पहली बार आधिकारिक पर्यटन लोगो और समर्पित पर्यटन वेबसाइट तैयार की जाएगी, जो संभल की ऐतिहासिक विरासत को डिजिटल मंच प्रदान करेगी।

इस वेबसाइट के माध्यम से देश और विदेश के पर्यटक संभल के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी एक क्लिक पर प्राप्त कर सकेंगे। प्रस्तावित पोर्टल पर प्रमुख मंदिरों, ऐतिहासिक स्मारकों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन केंद्रों की ऑडियो-वीडियो सामग्री, फोटो गैलरी और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि संभल की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को अब तक वह व्यापक पहचान नहीं मिल सकी है जिसकी वह वास्तविक रूप से हकदार है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जिले की पहचान को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की योजना तैयार कर ली गई है। पर्यटन विभाग को वेबसाइट निर्माण के साथ उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल कंटेंट विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।

संभल का इतिहास हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु का दसवां और अंतिम अवतार भगवान कल्कि इसी धरती पर अवतरित होंगे। यही कारण है कि धार्मिक दृष्टि से संभल को विशेष महत्व प्राप्त है। यहां स्थित प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। इतिहासकारों के अनुसार मध्यकाल में भी संभल एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित रहा। दिल्ली सल्तनत और मुगलकाल में भी इसकी विशेष पहचान रही। जिले में मौजूद अनेक प्राचीन स्मारक और ऐतिहासिक स्थल आज भी उसके गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करते हैं।

जहां अब प्रस्तावित वेबसाइट पर जिले के 68 प्रमुख तीर्थस्थलों, 19 प्राचीन कूपों और अनेक ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी उपलब्ध होगी। इनमें प्राचीन सौंधन, फिरोजपुर किला, ऐतिहासिक बावड़ी, चक्की का पाट, चोर कुआं, तोता-मैना स्थल, चंदेश्वर महादेव, भुवनेश्वर महादेव, संभलेश्वर महादेव, अमरपति खेड़ा, बेरनी शिव मंदिर, हरि बाबा बांध आश्रम और चंदौसी का बांके बिहारी मंदिर जैसे प्रमुख स्थल शामिल किए जाएंगे।

प्रत्येक स्थल के साथ उसका इतिहास, धार्मिक महत्व, पहुंच मार्ग, फोटो गैलरी और ऑडियो-वीडियो प्रस्तुति भी उपलब्ध होगी। इससे पर्यटकों को न केवल जानकारी मिलेगी बल्कि भ्रमण के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकेगा। संभल की पहचान अब इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल माध्यम से यह विरासत दुनिया के सामने अपनी नई उपस्थिति दर्ज कराएगी।

पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय रोजगार और व्यापार को नई गति मिलेगी। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य व्यवसायों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही जिले की सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती मिलेगी।
संभल, जो अब तक अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता रहा है, जल्द ही आधुनिक डिजिटल पहचान के साथ देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करता नजर आएगा।
इस संबंध में संभल पर्यटन पोर्टल और वेबसाइट विकसित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
— अंकित खंडेलवाल, डीएम, संभल