इक़बाल महमूद का सरकार पर हमला, कहा- देश में खत्म हो रहा प्रजातंत्र।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं संभल से विधायक इक़बाल महमूद ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। शनिवार शाम अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था लगातार कमजोर की जा रही है और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास हो रहा है।
इक़बाल महमूद ने पश्चिम बंगाल के चुनावी हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां निष्पक्ष चुनाव नहीं हुए, बल्कि वोटों की “लूट” हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। उनका दावा था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव के दौरान भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए और लाखों लोगों को मतदान करने से रोका गया।
सपा विधायक ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को हटाकर भाजपा समर्थक लोगों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि देश में अब लोगों के मतदान के अधिकार तक छीने जा रहे हैं और लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है।
इक़बाल महमूद ने भाजपा की लगातार चुनावी सफलता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “भगवा रंग लगातार गहरा होता जा रहा है”, जो लोकतांत्रिक संतुलन के लिए ठीक संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट होना होगा और जो भी दल भाजपा को हराने की स्थिति में होगा, समाजवादी पार्टी उसका समर्थन करने के लिए तैयार है।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तैयारी में जुटी है और भाजपा के खिलाफ रणनीति तैयार की जा रही है। तमिलनाडु की राजनीति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का अवसर मिलना चाहिए।
इंडिया गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर सपा विधायक ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष दलों का उद्देश्य भाजपा जैसी सांप्रदायिक ताकतों को रोकना है और इसके लिए गठबंधन किसी भी दल को समर्थन दे सकता है।
इक़बाल महमूद के इस बयान के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके बयान को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

पत्रकारों ने स्वगणना कर, दिया जागरूकता का संदेश।

डीआईओ कार्यालय पर अपने सोशल अकाउंट्स पर साझा किए फोटो।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। जिलाधिकारी के निर्देशन में 7 मई से 21 मई तक चल रहे विशेष जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत शनिवार को जिला सूचना कार्यालय परिसर में स्व-गणना को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिले के पत्रकारों ने अपने-अपने घरों की लोकेशन पर की गई स्व-गणना के फोटो सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा कर आमजन को भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में जिला सूचना अधिकारी बृजेश कुमार के नेतृत्व में सभी पत्रकार एकत्रित हुए और स्व-गणना प्रक्रिया को अपनाते हुए लोगों को डिजिटल माध्यम से जनगणना में सहभागिता करने का संदेश दिया। पत्रकारों ने कहा कि स्व-गणना से नागरिक घर बैठे अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

जिला सूचना अधिकारी बृजेश कुमार ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप अधिक से अधिक लोगों को स्व-गणना के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि नागरिक बढ़-चढ़कर इसमें भाग लें और सही आंकड़े उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस अवसर पर जितेंद्र पाल, अंकित कुमार, वीरपाल सिंह, शिवकुमार कुशवाह, त्रिभुवन शर्मा, योगेश गुप्ता, महेंद्र कुमार, अंशुल, अंकुर, प्रदीप गुप्ता, सचिन सहित अन्य पत्रकार उपस्थित रहे।

ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, की शिकायत।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। रजपुरा थाना क्षेत्र के सैंडोरा गांव में ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए शिकायत की गई है।
जहां ग्रामीण ने गांव के ही तीन लोगों पर उनके खुद के नाम पर दर्ज भूमि से लगभग डेढ़ गुना अधिक ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है।
थाना क्षेत्र के सैंडोरा का निवासी शिकायतकर्ता भगवान सिंह पुत्र बोली सिंह ने थाना समाधान दिवस में शिकायती पत्र देते हुए कहा है कि गांव के ही देवेंद्र, सुरेंद्र एवं गजेंद्र पुत्र राम सिंह के नाम लगभग आठ बीघा जमीन दर्ज है। लेकिन उन्होंने डेढ़ गुना अधिक भूमि पर कब्जा कर लिया है।
इसके अलावा भी ग्राम समाज और सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा है कि राजस्व अभिलेखों में बंजर भूमि के नाम से दर्ज भूमि पर भी कब्जा किया गया है।
उन्होंने कहा कि कई बार शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है और इसके अलावा आइजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत की गई, लेकिन फर्जी रिपोर्ट लगा दी गई।
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई है साथ ही ग्राम समाज की भूमि से कब्जा हटवा कर वहां पर पुलिस चौकी या अन्य सरकारी कार्य शुरू करने की मांग की गई है।

यूपी पुलिस का वो अफसर, जिसके नाम से कांपते हैं अपराधी; अब वेब सीरीज में दिखेगी कहानी।

◆ अखाड़े से खाकी तक: अर्जुन अवार्डी अनुज चौधरी की संघर्षगाथा देगी प्रेरणा।

मैदान में मेडल और खाकी में मिशन, अनुज चौधरी के जीवन का हर रंग आएगा नजर।

प्रवाह ब्यूरो
फिरोजाबाद। ओलंपियन पहलवान से लेकर यूपी पुलिस के दबंग अफसर तक का सफर तय करने वाले एएसपी अनुज चौधरी अब बड़े पर्दे पर नजर आ सकते हैं। उनके जीवन पर फिल्म या वेब सीरीज बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। कई नामी प्रोडक्शन हाउस उनके संघर्ष, खेल उपलब्धियों और खाकी में निभाई जा रही जिम्मेदारियों की कहानी को स्क्रीन पर उतारने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
फिरोजाबाद में एएसपी देहात के पद पर तैनात अनुज चौधरी अपनी सख्त कार्यशैली, फिटनेस और बेबाक अंदाज के चलते लगातार चर्चा में बने रहते हैं। संभल में सीओ रहते हुए उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाइयों से सुर्खियां बटोरी थीं। जिसके बाद ही योगी सरकार ने उन्हें पुलिस क्षेत्राधिकारी से प्रोन्नत करते हुए अपर पुलिस अधीक्षक बनाया गया था।

यही वजह है कि अब उनका जीवन फिल्म निर्माताओं को भी आकर्षित कर रहा है।
मुजफ्फरनगर के बझेड़ी गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाले अनुज चौधरी ने बेहद साधारण माहौल से अपनी शुरुआत की थी। गांव के अखाड़े से कुश्ती सीखते हुए उन्होंने देश के लिए कई बड़े मंचों पर शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2004 के एथेंस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले अनुज चौधरी ने कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई प्रतियोगिताओं में भी कई पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। लंबे समय तक राष्ट्रीय चैंपियन रहने वाले अनुज को खेल जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
खेल कोटे से यूपी पुलिस में शामिल होने के बाद अनुज चौधरी ने अपनी अलग पहचान बनाई। अपराध और माफियाओं के खिलाफ सख्त रवैये के कारण उनकी छवि एक निर्भीक और दबंग पुलिस अधिकारी की बन गई। सोशल मीडिया पर भी उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है, जहां युवा उनकी फिटनेस और अनुशासन को काफी पसंद करते हैं।
सूत्रों के मुताबिक कई निर्माता उनके जीवन पर आधारित स्क्रिप्ट तैयार कर रहे हैं। जहां कहानी में एक गांव के पहलवान से ओलंपियन बनने और फिर खाकी पहनकर अपराध के खिलाफ मोर्चा संभालने तक के पूरे सफर को दिखाया जायेगा।

संभल में बाबा गैंग का भंडाफोड़, पुलिस ने 6 आरोपियों को पकड़ा।

◆ तमंचा और बोलेरो के साथ आरोपी गिरफ्तार, रंगदारी मांगने का आरोप।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। शुक्रवार को संभल पुलिस को बड़ी सफलता मिली जहां पुलिस ने रंगदारी और धमकी देकर दहशत फैलाने वाले तथाकथित बाबा गैंग के छह सदस्यों को गिरफ्तार जेल भेज दिया है। सर्विलांस, एसओजी और थाना जुनावई पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों को दबोचा गया।
आरोपियों पर एक ग्रामीण से एक लाख रुपये की रंगदारी मांगने और रकम न देने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। पुलिस ने इनके कब्जे से दो अवैध तमंचे, दो जिंदा कारतूस और एक बोलेरो वाहन भी बरामद किया है।
शुक्रवार को पुलिस लाइन बहजोई में आयोजित प्रेसवार्ता में एएसपी दक्षिणी मनोज रावत ने बाबा गैंग मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गुन्नौर सर्किल की थाना जुनावई पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, 6 मई को थाना जुनावई क्षेत्र के दफ्तरा हिमचल गांव निवासी रामपाल पुत्र भूदेव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बाबा गैंग के सदस्यों ने उनसे एक लाख रुपये की रंगदारी मांगी और जान से मारने की धमकी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अंकित, अवधेश और 10 से 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
गिरफ्तार आरोपियों में अंकित उर्फ दीपेंद्र पुत्र राकेश उर्फ जयवीर निवासी दबथरा हरलाल, अवधेश उर्फ उपदेश कुमार पुत्र मुकेश निवासी अजीजपुर, सुरेंद्र पुत्र सरवन निवासी नगला डुमैल थाना जुनावई, प्रिंस पुत्र दिनेश शर्मा, कुलदीप जडेजा पुत्र बाबूराम निवासी यादव कॉलोनी तथा अमन शर्मा पुत्र मनोज शर्मा निवासी बिजलीघर थाना बहजोई शामिल हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे बाबा गैंग के सदस्य हैं और उनके गिरोह में 25 से 30 लोग सक्रिय हैं। गैंग के सदस्य व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। आरोपी लोगों को डराकर और धमकाकर रंगदारी वसूलते थे और उसी पैसे से अपने शौक व मौज-मस्ती पूरी करते थे।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी जेल जा चुके हैं। इलाके में उनका खौफ होने के कारण लोग शिकायत करने से बचते थे। आरोपियों ने रामपाल को डराने के लिए हवाई फायरिंग भी की थी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तमंचा और बोलेरो वाहन भी बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी अंकित और अमन पर चार-चार, अवधेश और प्रिंस पर पांच-पांच, कुलदीप पर तीन तथा सुरेंद्र पर दो आपराधिक मुकदमे पहले से दर्ज हैं।
उक्त संबंध में एएसपी दक्षिणी मनोज कुमार रावत ने बताया कि 3 मई को रामलाल नामक व्यक्ति को अंकित, अवधेश और उनके साथियों ने रास्ते में रोक लिया था। आरोपियों ने उससे एक लाख रुपये की रंगदारी मांगी। विरोध करने पर बदमाशों ने दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग की और मौके से फरार हो गए। उन्होंने बताया कि मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी भी की जाएगी।

संभल में डिजिटल जनगणना का शुभारंभ, जिला जज व डीएम ने की सहभागिता।

◆ अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी, लोगों से भी जुड़ने की अपील।

स्व पंजीकरण कर एसडीएम नीतू रानी बोलीं- जनगणना में हिस्सा लेना हर नागरिक का दायित्व।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। संभल में स्व-जनगणना 2026 का कार्यक्रम शुरू हो गया है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में ऑनलाइन स्व-जनगणना का कार्य प्रारंभ कर दिया। जिसमें अधिकारियों कर्मचारियों के अलावा जनपद की जनप्रतिनिधि भी बढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। चंदौसी उप जिलाधिकारी नीतू रानी ने बताया कि यह शासन का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जो 7 मई से 21 मई तक चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति और परिवार अपने मुखिया के नाम और मकान में रहने वालों की संख्या को अंकित करते हुए स्व-जनगणना कर सकेगा। स्व-जनगणना के बाद उसकी एक आईडी बनेगी। इस आईडी को एन्यूमरेटर को देने पर जनगणना का डेटा अंतिम रूप से सुरक्षित हो जाएगा। उन्होंने सभी लोगों से अधिक से अधिक संख्या में स्व-जनगणना कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की, ताकि डेटा शुद्ध और सुरक्षित रहे और शासन की नीतियां जनगणना के अनुरूप बन सकें।

संभल जनपद में चल रहे स्व-जनगणना अभियान को जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। अभियान के तहत जिला जज से लेकर विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक ने स्वयं पंजीकरण कर नागरिकों को भी इसमें भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

स्व-जनगणना प्रक्रिया में जिला जज विदुषी सिंह, जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल, पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई, एडीएम प्रदीप वर्मा और सीडीओ गोरखनाथ भट्ट ने भी सहभागिता निभाई।
इसके अलावा चंदौसी से भाजपा विधायक एवं माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी, संभल से सपा विधायक इकबाल महमूद, असमोली विधायक पिंकी यादव, गुन्नौर विधायक राम खिलाड़ी सिंह यादव तथा भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी हरेंद्र सिंह रिंकू समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी स्व-जनगणना कर अभियान को समर्थन दिया।

प्रशासन की ओर से शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्राम प्रधानों, जिला पंचायत सदस्यों, सभासदों और विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को अभियान से जोड़कर लोगों को स्व-जनगणना के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने बताया कि जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष कैंप, जनसंपर्क कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे 7 मई से 22 मई तक चल रहे इस विशेष अभियान में स्वयं आगे आकर जनगणना फॉर्म में अपनी जानकारी दर्ज करें। उन्होंने कहा कि इससे जनगणना कर्मचारियों का कार्य आसान होगा और अधिक सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही कहा जन सुलभता और अधिक पारदर्शिता को ध्यान में रखकर भारत सरकार ने पहली बार नागरिकों को मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल माध्यमों से घर बैठे स्व-जनगणना करने की सुविधा उपलब्ध कराई है, ताकि लोग स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकें।

संभल में सेवानिवृत्त शिक्षक की बेटी ने फंदे पर लटककर दी जान।

◆ 20 मिनट तक बेटी को पुकारते रहे पिता, फिर पड़ोसियों की मदद से तोड़ना पड़ा दरवाजा।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। गुरुवार को चंदौसी क्षेत्र में एक युवती द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। घटना पंचशील कॉलोनी की है, जहां सेवानिवृत्त शिक्षक की 24 वर्षीय बेटी दीपिका सिंह ने कथित रूप से कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। सूचना मिलने पर पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची तथा जांच शुरू कर दी गई।
बताया गया कि दीपिका अपने पिता मेहताब सिंह के साथ घर पर रह रही थी। मेहताब सिंह हाल ही में एक इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए हैं। बुधवार शाम वह दूध लेने के लिए घर से बाहर गए थे। करीब एक घंटे बाद लौटने पर घर का मुख्य गेट अंदर से बंद मिला। काफी देर तक आवाज देने के बावजूद जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उन्होंने पड़ोसियों को बुलाया।
इसके बाद मजदूर की मदद से लोहे का गेट तुड़वाया गया। घर के अंदर पहुंचने पर दीपिका के कमरे का दरवाजा भी बंद मिला। खिड़की से झांकने पर युवती साड़ी के सहारे पंखे से लटकी दिखाई दी। यह दृश्य देखकर पिता बदहवास हो गए। आसपास के लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
रात में पुलिस क्षेत्राधिकारी दीपक तिवारी, थाना प्रभारी अनुज तोमर और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
परिजनों और मोहल्ले के लोगों के अनुसार दीपिका पढ़ाई को लेकर तनाव में थी। चर्चा है कि वह बीए अंतिम वर्ष की परीक्षा में सफल नहीं हो पाई थी। हालांकि पुलिस ने अभी किसी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
दीपिका तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी थी। उसका भाई जयपुर और बहन दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि मां पिछले कई दिनों से अपने मायके गई हुई थीं। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
सीओ चंदौसी दीपक तिवारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

मथुरा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मुठभेड़ में बाबरिया गैंग के दो बदमाश ढेर।

कारोबारी को बंधक बनाकर डाला था डाका, राजस्थान के निकले दोनों बदमाश।

प्रवाह ब्यूरो
मथुरा। गुरुवार को मथुरा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुठभेड़ में दो शातिर बदमाशों को ढेर कर दिया। बावरिया गैंग की मारी गई दोनों बदमाशों पर 50-50 हजार रुपए का इनाम था। दोनों बदमाशों पर कारोबारी को बंधक बनाकर डाका डालने का आरोप था। पुलिस के अनुसार, मारे गए दोनों आरोपी मूलत: राजस्थान के निवासी बताए जा रहे हैं।
पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए धर्मवीर उर्फ लंबू एवं राजेंद्र उर्फ पप्पू ने  अपने तीन साथियों के साथ मिलकर छत के रास्ते घुस 23 अप्रैल की रात अजय अग्रवाल के घर डाका डाला था।।
जहां उन्होंने अजय अग्रवाल, उनके पिता, पत्नी और 6 साल की मासूम बच्ची को रस्सियों से बांध दिया। गन प्वाइंट पर लॉकर की चाबी ली। करीब ढाई घंटे तक घर में खुलकर लूटपाट की। वारदात के बाद SSP श्लोक कुमार ने डकैतों की तलाश के लिए 17 टीमें बनाई थीं। बुधवार को पुलिस को डकैतों के यमुना एक्सप्रेस-वे के पास होने का इनपुट मिला। पुलिस ने घेराबंदी कर ली। सुबह 7 बजे दो संदिग्ध बाइक से आते दिखे। पुलिस ने रुकने का इशारा किया तो बाइक सवार यूटर्न लेकर भागने लगे। इस दौरान बेकाबू होकर उनकी बाइक गिर गई। पकड़े जाने के डर से उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। गोली लगने से दोनों बदमाश घायल हो गए। पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। डकैत धर्मवीर पर मथुरा के अलावा हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में डकैती, हत्या की कोशिश, छिनैती, चोरी समेत 16 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, डकैत पप्पू पर मेरठ, फिरोजाबाद, मथुरा के अलावा हरियाणा और दिल्ली में डकैती समेत 11 मुकदमे दर्ज हैं।
टैंटीगांव में 23 अप्रैल की रात 12.30 बजे 5 नकाबपोश बदमाश पहुंचे। किराना व्यवसायी अजय अग्रवाल के घर छत के रास्ते घुसे। घर में मौजूद सभी लोगों को बंधक बना लिया। बदमाशों ने अजय अग्रवाल, उनके पिता प्रेम प्रकाश अग्रवाल, पत्नी अनीता अग्रवाल और 6 साल की मासूम बच्ची उमा को रस्सियों से बांध दिया। गन प्वाइंट पर लेकर व्यापारी से लॉकर की चाबी ली।इसके बाद करीब ढाई घंटे तक घर में खुलकर लूटपाट की। बदमाशों ने रात तीन बजे तक घर को खंगाला। करीब 20 लाख रुपए का माल समेटकर फरार हो गए। लूट में तीन लाख रुपए से ज्यादा कैश और सोने-चांदी के जेवरात बताए गए। जाते-जाते बदमाश साक्ष्य मिटाने के लिए घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की DVR भी उखाड़ ले गए थे। डकैतों की मुठभेड़ में स्वार टीम प्रभारी अजय वर्मा एवं हेड कांस्टेबल दुर्ग विजय भी घायल हुए हैं।

वहीं एसपी देहात ने पुलिस की 17 टीमें घटना के खुलासे के लिए लगाई थीं। पुलिस ने आसपास के 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरे खंगाले और 500 से ज्यादा संदिग्ध और अन्य लोगों से पूछताछ की। 10 जिलों में दबिश देने के बाद भी पुलिस बदमाशों तक पहुंच सकी।
मथुरा एसपी श्लोक कुमार ने बताया ने बताया कि सुरीर थाना क्षेत्र में हुई डकैती के बाद पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी। जांच के दौरान पता चला कि यही गिरोह नोएडा, दिल्ली, पलवल और रिवाडी में भी कई वारदातों को अंजाम दे चुका था।
एसएसपी के अनुसार, बुधवार रात पुलिस को बदमाशों की गतिविधियों की अहम जानकारी मिली, जिसके बाद घेराबंदी कर कार्रवाई की गई। मारे गए बदमाशों में राजेंद्र उर्फ पप्पू पर 11 और धर्मवीर उर्फ लंबू पर चोरी, लूट और डकैती समेत 16 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी अक्सर नाम बदलकर वारदात करते थे और कई बार जेल भी जा चुके थे। पुलिस ने उनके कब्जे से डकैती में लूटा गया कुछ नकद और जेवरात भी बरामद किए हैं।

मुरादाबाद डीएम की सुरक्षा सख्त, DFMD जांच के बाद ही मिलेगी एंट्री।

◆ संभल में कड़े फैसलों की वजह से सुर्खियों में रहे हैं डा. राजेंद्र पैंसिया।

प्रवाह ब्यूरो
मुरादाबाद। जनपद के नवागत जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। अब डीएम से मिलने आने वाले सभी फरियादियों और आगंतुकों को डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) से होकर गुजरना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना सुरक्षा जांच के किसी भी व्यक्ति को डीएम कक्ष में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
डीएम कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहले से तैनात सुरक्षा कर्मियों के अलावा अब एक अतिरिक्त पुलिस टीम भी लगाई गई है। यह टीम प्रत्येक आगंतुक की गहन जांच करेगी। सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को भी टीम में शामिल किया गया है, ताकि महिला फरियादियों की जांच भी सुचारु रूप से की जा सके।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय सुरक्षा मानकों को और बेहतर बनाने तथा किसी भी संभावित खतरे को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। हाल के समय में वीआईपी सुरक्षा को लेकर बढ़ती सतर्कता के चलते इस तरह के कदम आवश्यक माने जा रहे हैं।
गौरतलब है कि इसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आन्जनेय सिंह के कार्यालय में भी लागू है। करीब दो वर्ष पूर्व उनके कार्यालय पर भी DFMD के साथ अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। वहां भी कमिश्नर से मुलाकात से पहले आगंतुकों को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया से गुजरना होता है।
नवागत जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने हाल ही में मुरादाबाद में पदभार ग्रहण किया है। इससे पहले वे करीब दो वर्षों तक संभल जिले के जिलाधिकारी रहे, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण और सख्त प्रशासनिक निर्णय लिए। उनके कार्यकाल के दौरान कई संवेदनशील मामलों में कार्रवाई के चलते वे राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में रहे।

भ्रामक आदेश बताने पर संभल डीआईओएस पर 1 लाख का हर्जाना।

◆ मनमाने आदेश पर हाईकोर्ट सख्त, आदेश रद्द; वेतन से 1 लाख जमा करने के निर्देश।

प्रवाह ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मनमाना आदेश पारित कर याची को दोबारा अदालत आने पर मजबूर करने के मामले में संभल के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) पर कड़ी कार्रवाई की है। अदालत ने न सिर्फ उनका आदेश रद्द किया, बल्कि एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यह हर्जाना राशि अधिकारी अपने वेतन से एक सप्ताह के भीतर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, संभल में जमा करें। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति द्वारा दायर याचिका का निस्तारण करते हुए दिया।
दरअसल, इससे पहले 19 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने डीआईओएस के आदेश को रद्द करते हुए उन्हें नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया था। साथ ही यह स्पष्ट करने को कहा था कि स्व-वित्तपोषित योजना के तहत शिक्षकों की नियुक्तियां नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। चयनित शिक्षक को तदर्थ प्रधानाचार्य का कार्यभार संभालने की अनुमति भी दी गई थी।
इसके बावजूद डीआईओएस ने अदालत के आदेश पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि कोर्ट को गुमराह कर आदेश प्राप्त किया गया है और इसे अस्वीकार कर दिया। इस पर याचिकाकर्ता को पुनः हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि जब राज्य सरकार ने स्वयं उस आदेश को चुनौती नहीं दी, तो डीआईओएस को इस तरह की टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं था। साथ ही यह भी कहा कि अधिकारी ने न केवल आदेश की गलत व्याख्या की, बल्कि याचिकाकर्ता को दोबारा अदालत आने के लिए मजबूर किया, जो न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
अदालत ने जुर्माना लगाने के साथ ही डीआईओएस को अंतिम अवसर देते हुए मामले को पुनः उनके पास भेज दिया है। निर्देश दिया गया है कि वे 19 जनवरी के आदेश का अक्षरशः पालन करते हुए नए सिरे से निर्णय लें। साथ ही चेतावनी भी दी कि अधिकारी भविष्य में आदेशों की सही व्याख्या करें।