गुन्नौर बार वेलफेयर एसोसिएशन ने किया ई-रजिस्ट्री व्यवस्था का विरोध।

गुन्नौर रजिस्ट्री के आगे धरने पर बैठे सैंकड़ो अधिवक्ता।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में गुन्नौर बार वेलफेयर एसोसिएशन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। सोमवार को इस संबंध में अधिवक्ताओं, प्रलेखकों, टाइपिस्टों, स्टांप वेंडरों तथा रजिस्ट्री कार्य से जुड़े लोगों ने जिलाधिकारी संभल के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजकर अपनी आपत्तियां प्रस्तुत कीं।
ज्ञापन में कहा गया कि प्रस्तावित ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को लागू करने से पहले सरकार ने संबंधित पक्षों से पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया है। संगठन का आरोप है कि बिना व्यापक संवाद के लिए गया यह निर्णय न केवल अधिवक्ताओं बल्कि रजिस्ट्री व्यवस्था से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है।
ज्ञापन के अनुसार रजिस्ट्री प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें अधिवक्ताओं की भूमिका नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम मानी जाती है। संगठन का कहना है कि यदि संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ दिया जाता है तो इससे दस्तावेज लेखक, स्टांप विक्रेता, टाइपिस्ट और अन्य संबंधित लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हैं। ऐसे में पूरी व्यवस्था को डिजिटल स्वरूप देने से ग्रामीण जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है और उनके हित भी प्रभावित हो सकते हैं।
साइट के अध्यक्ष अध्यक्ष शैलेंद्र यादव की नेतृत्व में विरोध जताने वाले अधिवक्ताओं ने सरकार से मांग की कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू करने से पहले अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं और अन्य संबंधित पक्षों से विस्तृत चर्चा की जाए। साथ ही ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे आधुनिक तकनीक का लाभ भी मिले और लोगों की आजीविका पर भी प्रतिकूल असर न पड़े।
बार वेलफेयर एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आगे व्यापक आंदोलन की रणनीति भी बनाई जायेगी।

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