
◆ पुण्य की डुबकी लगाने गंगा घाटों पर पहुंचे लाखों श्रद्धालु, सुरक्षा में मुस्तैद रहा पुलिस-प्रशासन।
प्रवाह ब्यूरो
संभल। ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार को संभल जनपद के गंगा तटों पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। पुण्य लाभ की कामना लेकर संभल समेत आसपास के कई जनपदों से लाखों श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचे और श्रद्धापूर्वक गंगा स्नान कर धर्म लाभ अर्जित किया।
सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का गंगा घाटों पर पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की। घाटों पर “हर-हर गंगे” और “गंगा मैया की जय” के जयघोषों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
तहसील गुन्नौर क्षेत्र के राजघाट गंगा, सिसौना डांडा, श्रीविष्णु देव घाट, हरिबाबा बांध सहित अस्थायी असदपुर और सांकराघाट पर दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। बुलंदशहर, बदायूं, अलीगढ़, बरेली और रामपुर समेत कई जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। थाना जुनावई प्रभारी धीरज सिंह, गुन्नौर थाना प्रभारी संजय कुमार, बबराला थाना प्रभारी सौरभ त्यागी तथा रजपुरा थाना प्रभारी संदीप चौधरी पुलिस बल के साथ घाटों पर सक्रिय दिखे। अधिकारी लगातार निगरानी कर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। गंगा स्नान के चलते संभल-अनूपशहर मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ गया, जिससे कई स्थानों पर लंबा जाम लग गया। इसके बावजूद प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए। राजघाट और सिसौना डांडा गंगा घाट पर लगे मेलों में भी श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भाग लिया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना तथा दान-पुण्य करने से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी को देखते हुए जल, छाता, पंखा और अन्न का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है।
मान्यता है कि इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा श्रवण, लक्ष्मी व्रत तथा रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर गंगा तटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर सनातन आस्था की विराटता का परिचय दिया।