◆ बच्चों के भोजन में लापरवाही पर डीएम सख्त, मिड-डे मील में खामियां मिलीं तो कार्रवाई तय, 128 स्कूलों में औचक जांच से मचा हड़कंप।
◆ प्राथमिक विद्यालय मुडेना की बदहाल स्थिति पर गिरी गाज, इंचार्ज अध्यापक निलंबित।
प्रवाह ब्यूरो
संभल। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल के निर्देश पर जिले के सरकारी विद्यालयों में संचालित मिड-डे मील योजना की व्यवस्थाओं की लगातार जांच की जा रही है। प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूली बच्चों को निर्धारित मीनू और मानकों के अनुरूप पौष्टिक भोजन, फल और दूध मिल रहा है या नहीं। इसी क्रम में 11 सितंबर को गुन्नौर ब्लॉक के सभी 128 सरकारी विद्यालयों में एक साथ औचक निरीक्षण किया गया।
गुन्नौर तहसील एवं बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अलग-अलग विद्यालयों में पहुंचकर मिड-डे मील की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान केवल भोजन की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन, फल और दूध का वितरण, भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की मात्रा, बर्तनों की साफ-सफाई तथा खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण की भी जांच की गई।

अधिकारियों ने विद्यालयों में तैनात रसोइयों की निर्धारित ड्रेस में मौजूदगी, रसोईघर की स्थिति और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। इसके साथ ही विद्यालयों में संचालित पोषण वाटिका की स्थिति तथा रसोइयों के मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा कार्ड से संबंधित जानकारी भी जुटाई गई।
औचक जांच के दौरान कुछ विद्यालयों में व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं। ग्राम पंचायत मड़ेना के प्राथमिक विद्यालय की स्थिति खराब पाए जाने पर इंचार्ज अध्यापक खजनपाल सिंह को निलंबित कर दिया गया। वहीं, सात अन्य विद्यालयों में भी व्यवस्थाओं में कमियां सामने आईं। इनमें उच्च प्राथमिक विद्यालय मूड़ेना, गंगावास, अब्दुलहई जडवार तथा कंपोजिट विद्यालय घघैया, पाठकपर और बाजपुर शामिल हैं। इन विद्यालयों के प्रधानाध्यापक अथवा इंचार्ज अध्यापकों का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया गया है।

संबंधित शिक्षकों को तीन दिन के भीतर साक्ष्यों के साथ अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से विद्यालयों में मिड-डे मील योजना को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और शिक्षकों के बीच सख्ती का संदेश गया है।
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। बच्चों को निर्धारित मीनू और शासन द्वारा तय मानकों के अनुसार पौष्टिक भोजन, फल एवं शुद्ध दूध उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि मिड-डे मील योजना में लापरवाही, अनियमितता अथवा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के अनुसार डीएम के निर्देश पर जिले के अन्य विकासखंडों में भी मिड-डे मील योजना की जांच जारी रहेगी। सभी प्रधानाध्यापकों को निर्धारित मीनू, स्वच्छता और गुणवत्ता संबंधी मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
