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8 लाख की कथित डीलिंग में एक सिपाही लाइन हाजिर, 3 का तबादला; अफीम तस्करी के 3 युवकों को छोड़ने का आरोप।

◆ सीओ बिल्सी को सौंपी गई प्रारंभिक जांच, उच्चाधिकारियों तक पहुंचा मामला; जांच में सामने आए चार सिपाहियों के नाम।

◆ डकैती के खुलासे के बाद भी इस्लामनगर में बना रहा आरोपी सिपाही।

प्रवाह ब्यूरो
बदायूं। इस्लामनगर थाना क्षेत्र में अफीम तस्करी के आरोप में पकड़े गए तीन युवकों को कथित तौर पर 8 लाख रुपये लेकर छोड़ने का मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार देर रात पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक सिपाही को लाइन हाजिर कर दिया, जबकि तीन अन्य सिपाहियों को अलग-अलग थानों में स्थानांतरित कर दिया गया। पूरे मामले की विभागीय जांच एसपी सिटी अभिषेक सिंह को सौंपी गई है।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार रात इस्लामनगर पुलिस ने बरेली के सिरौली क्षेत्र के दो लोगों समेत तीन युवकों को कथित रूप से अफीम तस्करी के आरोप में पकड़ा था। चर्चा यह भी रही कि पुलिस को उनके कब्जे से अफीम बरामद हुई थी। हालांकि, इस बरामदगी और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
आरोप है कि तीनों युवकों को थाने लाने के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बजाय उन्हें छोड़ने को लेकर कथित सौदेबाजी हुई। चर्चा के अनुसार, 8 लाख रुपये की कथित डीलिंग के बाद रविवार सुबह तीनों युवकों को छोड़ दिया गया। रकम ऑनलाइन लिए जाने की पेशकश की चर्चा भी सामने आई, लेकिन कथित तौर पर भुगतान नकद में किए जाने की बात कही जा रही है।
मामला सोमवार को एसएसपी अंकिता शर्मा के संज्ञान में पहुंचा। इसके बाद सीओ बिल्सी आलोक सिद्धू को प्रारंभिक जांच सौंपी गई। इसी बीच प्रकरण की गंभीरता की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद बरेली रेंज के डीआईजी एके साहनी की ओर से भी मामले की पड़ताल कराए जाने की बात सामने आई।
जांच के दौरान इस्लामनगर थाने में तैनात अनुज चौधरी, काले सिंह, कपिल कुमार और रितिक तेवतिया के नाम सामने आने की बात कही गई है। आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों की तीनों युवकों को पकड़कर थाने लाने और बाद में कथित तौर पर छोड़ने की प्रक्रिया में भूमिका रही। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के निष्कर्ष के बाद ही होगी।
प्रकरण सामने आने के बाद एसएसपी अंकिता शर्मा ने कार्रवाई करते हुए रितिक तेवतिया को लाइन हाजिर कर दिया। वहीं अनुज चौधरी को फैजगंज बेहटा, काले सिंह को मुजरिया और कपिल कुमार को हजरतपुर थाने भेज दिया गया है।
पुलिस विभाग की इस कार्रवाई के बाद इस्लामनगर थाने की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
मामले में लाइन हाजिर किए गए सिपाही रितिक तेवतिया की तैनाती को लेकर भी चर्चा तेज है। बताया जाता है कि करीब चार महीने पहले इस्लामनगर क्षेत्र में हुई डकैती के खुलासे के लिए उसे तीन अन्य सिपाहियों के साथ वहां अटैच किया गया था।
डकैती का खुलासा होने और 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद अन्य तीन सिपाही अपने मूल स्थानों पर वापस चले गए, लेकिन रितिक तेवतिया इस्लामनगर थाने में ही तैनात रहा।
अब 8 लाख रुपये की कथित डीलिंग के मामले में उसका नाम सामने आने के बाद उसकी लंबे समय तक इस्लामनगर में तैनाती भी चर्चा का विषय बन गई है। यह दावा भी सामने आया है कि उसे सीओ बिल्सी का करीबी माना जाता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया ने बताया कि पूरे प्रकरण की विभागीय जांच एसपी सिटी अभिषेक सिंह को सौंपी गई है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अफीम तस्करी के आरोप में पकड़े गए तीन युवकों को कथित तौर पर किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में छोड़ा गया और 8 लाख रुपये की कथित डीलिंग में वास्तविक भूमिका किसकी थी। विभागीय जांच की रिपोर्ट के बाद ही इन सवालों का आधिकारिक जवाब सामने आने की उम्मीद है।

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