◆ डीएम द्वारा एडीएम की अध्यक्षता में जांच समिति गठित होते ही बढ़ी हलचल, सोशल मीडिया पर सफाई देने में जुटे आरोपी।
◆ ट्रस्ट नवीनीकरण में फर्जीवाड़े और चंदा गबन की शिकायत पर संभल डीएम अंकित खंडेलवाल ने गठित की है जांच समिति।
प्रवाह ब्यूरो
संभल। श्री हरिधाम बांध ट्रस्ट के नवीनीकरण और ट्रस्ट की संपत्तियों से जुड़ी धनराशि के कथित लेन-देन को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासनिक जांच के दरवाजे तक पहुंच गया है। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने एडीएम सत्यप्रिय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति के गठन के साथ ही ट्रस्ट से जुड़े लोगों में हलचल बढ़ गई है और सोशल मीडिया पर अपने-अपने पक्ष में सफाई देने के साथ एक-दूसरे पर आरोप लगाने का सिलसिला भी तेज होने की बात सामने आ रही है।
मामले में शिकायतकर्ताओं ने ट्रस्ट के नवीनीकरण की प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से लेकर ट्रस्ट की धनराशि को निजी खातों में स्थानांतरित किए जाने तक के आरोप लगाए हैं।

मामले को तूल पकड़ता देख संभल डीएम अंकित खंडेलवाल ने भी एडीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठन करने का आदेश दे दिया है। जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति में एडीएम सत्यप्रिय को अध्यक्ष, जबकि एसडीएम गुन्नौर अश्वनी वर्मा और जिला कोषाधिकारी प्रदीप कुमार को सदस्य बनाया गया है। समिति ट्रस्ट के नवीनीकरण से संबंधित अभिलेखों, शिकायतों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करेगी। जांच समिति के गठन के बाद अब मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच होगी। यही वजह है कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बीच बेचैनी बढ़ने और सोशल मीडिया पर सफाई का दौर शुरू होने की चर्चा है।

शिकायतकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट के नवीनीकरण के लिए फर्जी शपथपत्र, आधार कार्ड, मृत्यु प्रमाणपत्र, हस्ताक्षर और सामान्य सभा की सूची सहित अन्य दस्तावेज दाखिल किए गए। शिकायत के मुताबिक, 30 अक्टूबर 2025 को पत्रावली संख्या आई-33316 में दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे, जिसके आधार पर 12 नवंबर 2025 को ट्रस्ट का नवीनीकरण किए जाने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने इन दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठाते हुए उनके मूल अभिलेखों से मिलान कराने और पूरी नवीनीकरण प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। अब जांच समिति यह देखेगी कि प्रस्तुत किए गए दस्तावेज वास्तविक और वैध थे अथवा नहीं तथा नवीनीकरण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई थी या नहीं।

इसके अलावा विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू ट्रस्ट की जमीन पर बोई गई गन्ने की फसल से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फसल की बिक्री से प्राप्त रकम ट्रस्ट के खाते में जमा होने के बजाय निजी खातों में स्थानांतरित की गई। इस आरोप की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच समिति के लिए ट्रस्ट की जमीन, फसल की बिक्री, प्राप्त रकम, बैंक खातों और संबंधित लेन-देन के अभिलेखों का परीक्षण अहम होगा। जांच में यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो उससे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

जांच समिति के गठन के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। ट्रस्ट से जुड़े अलग-अलग पक्षों की ओर से सोशल मीडिया पर अपने बचाव में सफाई देने और दूसरे पक्ष की भूमिका पर सवाल उठाने की बात सामने आ रही है। इससे लंबे समय से चल रहा विवाद सार्वजनिक रूप से और मुखर होने के संकेत मिल रहे हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों और प्रतिदावों की सत्यता का निर्धारण प्रशासनिक जांच के बाद ही संभव होगा। फिलहाल प्रत्येक पक्ष अपने-अपने दावे सामने रख रहा है और वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होने की उम्मीद है।

श्री हरिधाम बांध ट्रस्ट से जुड़े इस पूरे प्रकरण में अब सबसे अहम भूमिका तीन सदस्यीय जांच समिति की होगी। समिति दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी।
जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रस्ट का नवीनीकरण नियमानुसार हुआ था या नहीं, कथित दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी थी या नहीं और ट्रस्ट की संपत्ति अथवा उससे प्राप्त आय की रकम के इस्तेमाल में कोई वित्तीय अनियमितता हुई या नहीं।
फिलहाल जांच की आंच पहुंचते ही जिस तरह आरोप-प्रत्यारोप और सफाइयों का दौर तेज हुआ है, उससे बांध-धाम का यह विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। अब दावों और प्रतिदावों से आगे प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने लाएगी।
■ विश्व प्रवाह के लिए रामौतार शर्मा की रिपोर्ट…
