◆ कागजों में तबादला के बाद भी, जमीन पर अब भी पुरानी तैनाती! करीब आधे कर्मचारियों ने अभी तक नहीं किया ज्वाइन।
प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के कार्यालयों में वर्षों से एक ही जगह जमे कर्मचारियों के तबादले के बाद भी पुरानी व्यवस्था पूरी तरह बदलती नजर नहीं आ रही है। विभाग ने 11 सितंबर को 488 कर्मचारियों के स्थानांतरण के आदेश जारी किए थे, लेकिन नई तैनाती मिलने के बावजूद करीब आधे कर्मचारी अब तक अपने नए कार्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाए हैं। ऐसे में कागजों पर हुआ प्रशासनिक फेरबदल अब जमीन पर अमल का इंतजार कर रहा है।
स्थानांतरण का उद्देश्य लंबे समय से एक ही कार्यालय या स्थान पर तैनात कर्मचारियों को दूसरी जगह भेजकर विभागीय कामकाज में बदलाव और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक गतिशील बनाना था। मगर आदेश जारी होने के बाद भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पुरानी तैनाती पर बने रहने से तबादले की मंशा पर ही सवाल उठने लगे हैं।
विभागीय स्तर पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, स्थानांतरित कर्मचारियों में बड़ी संख्या ऐसी है, जिन्होंने नई तैनाती पर अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। मुरादाबाद मंडल, विशेषकर संभल जनपद में भी ऐसे कर्मचारियों की तैनाती होने की बात सामने आई है। जिनका निरंतर मलाई मारने के चलते अब भी पुरानी जगह से मोह नहीं छूट रहा है। यानी कागजों पर तबादला हो चुका है, लेकिन जमीन पर कर्मचारी अभी भी पुरानी जगह पर ही मौजूद हैं।
लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों को हटाने के आदेश के बावजूद उनके पुरानी जगह पर बने रहने से स्थानीय स्तर पर भी स्थानांतरण प्रक्रिया के अनुपालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थिति का सीधा असर यह है कि तबादला आदेश जारी हो चुका है, लेकिन कर्मचारी अभी भी पुरानी व्यवस्था में ही काम कर रहे हैं। इससे प्रशासनिक फेरबदल का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित होता दिखाई दे रहा है।
अब मामला सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित नियंत्रक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि स्थानांतरित कर्मचारियों को तत्काल पुरानी तैनाती से कार्यमुक्त कर नई जगह कार्यभार ग्रहण कराया जाए।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आदेशों के बावजूद यदि कर्मचारी पुरानी तैनाती पर बने रहते हैं अथवा उन्हें समय से कार्यमुक्त नहीं किया जाता है तो संबंधित स्तर पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में अब निगाह उन अधिकारियों की भूमिका पर भी है, जिन्हें स्थानांतरित कर्मचारियों को कार्यमुक्त कराने की जिम्मेदारी दी गई है। अब देखना यह होगा कि विभागीय सख्ती के बाद स्थानांतरित कर्मचारी नई तैनाती पर कार्यभार संभालते हैं या पुरानी तैनाती से उनका मोह अब कार्रवाई के बाद ही टूटेगा।
