◆ 50 वर्षों में छठी बार बना अनोखा संयोग, 18-19 अक्टूबर को अष्टमी; 20 को मनेगी विजयादशमी।
प्रवाह ब्यूरो
वाराणसी। शारदीय नवरात्र इस बार श्रद्धालुओं के लिए विशेष संयोग लेकर आ रहा है। पंचांगीय गणना के अनुसार इस वर्ष नवरात्र 10 दिनों का होगा, जबकि अष्टमी तिथि दो दिन रहने के कारण नवरात्र की अवधि सामान्य से एक दिन अधिक हो गई है। काशी के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पिछले करीब 50 वर्षों में यह छठा अवसर है, जब इस तरह का संयोग बन रहा है। नवरात्र के दौरान तिथियों की स्थिति और उदया तिथि को लेकर भी इस बार विशेष स्थिति देखने को मिलेगी।
शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 11 अक्टूबर से होगा। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात तक रहेगी। वहीं अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को पूरे दिन से लेकर 19 अक्टूबर की सुबह 7:53 बजे तक रहेगी। तिथि के दो सूर्योदय तक रहने के कारण इसे दो दिन की उदया तिथि माना जा रहा है। इसके चलते नवरात्र की अवधि 10 दिनों की हो गई है। इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य पं. ऋतुपर्ण महाराज के मुताबिक
नवरात्र प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होगी और 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर नवरात्र का पहला दिन 11 अक्टूबर को माना जाएगा। तिथियों की इस स्थिति के कारण इस बार नवरात्र के दिनों की गणना सामान्य वर्षों से अलग रहेगी। श्रद्धालु 11 अक्टूबर से देवी के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना शुरू करेंगे।
विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर नवरात्र के दौरान विशेष पूजा, अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है।
इस वर्ष नवरात्र का सबसे महत्वपूर्ण संयोग अष्टमी तिथि को लेकर है। 18 अक्टूबर को पूरे दिन अष्टमी तिथि रहेगी और इसका क्रम 19 अक्टूबर की सुबह 7:53 बजे तक चलेगा। तिथि के दो सूर्योदय तक व्याप्त रहने के कारण अष्टमी की उदया तिथि दो दिनों में पड़ रही है।
अष्टमी को देवी उपासना में विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन श्रद्धालु मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कई स्थानों पर कन्या पूजन, हवन और विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं। इस बार अष्टमी की तिथि दो दिन तक रहने से श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
नवरात्र के समापन के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी पर्व मनाया जाएगा। दशहरा पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। देशभर में इस दिन धार्मिक कार्यक्रमों के साथ रावण दहन और अन्य आयोजन किए जाते हैं।
पंचांगीय गणना के अनुसार इस बार नवरात्र के दौरान तिथियों के विशेष संयोग के चलते प्रतिपदा से लेकर विजयादशमी तक पर्व की पूरी श्रृंखला सामान्य से अलग स्वरूप में दिखाई देगी।
इस बार मां दुर्गा के आगमन को लेकर भी विशेष धार्मिक संयोग बताया गया है। रविवार को नवरात्र शुरू होने के कारण मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। वहीं देवी के प्रस्थान का वाहन मुर्गा बताया गया है।
धार्मिक परंपराओं में नवरात्र के दौरान देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन का विशेष महत्व माना जाता है। इसी आधार पर श्रद्धालुओं में भी इस बार नवरात्र के आगमन को लेकर उत्सुकता है। नवरात्र के पहले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार देवी आराधना के लिए इस दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करना विशेष महत्व रखता है।
काशी के ज्योतिषियों की गणना के मुताबिक इस तरह का संयोग लंबे अंतराल के बाद देखने को मिल रहा है। बताया गया है कि पिछले 50 वर्षों में यह छठी बार है, जब नवरात्र की अवधि 10 दिनों की हो रही है और अष्टमी तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी। इस विशेष तिथि-संयोग के कारण इस बार शारदीय नवरात्र का धार्मिक महत्व श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
