◆ शुक्रवार सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक शुभ मुहूर्त, कृष्ण-द्रौपदी के प्रसंग से जुड़ी है राखी की परंपरा।
प्रवाह ब्यूरो
मथुरा। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार तारीख को लेकर बने असमंजस के बाद आखिरकार 28 अगस्त, शुक्रवार को ही मनाया जाएगा। पर्व को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बाजारों में रंग-बिरंगी राखियों, मिठाइयों और उपहारों की रौनक बढ़ने लगी है। बहनें अपने भाइयों की कलाई सजाने के लिए खास राखियों की खरीदारी में जुटी हैं, वहीं भाई भी बहनों को उपहार देने की तैयारी कर रहे हैं।
रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ समय को लेकर लोगों के बीच कई दिनों से चर्चा चल रही थी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार सावन पूर्णिमा की तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि और शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए 28 अगस्त को ही रक्षाबंधन मनाना शुभ माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्य ऋतुपर्ण महाराज के अनुसार 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए दो शुभ मुहूर्त रहेंगे। पहला शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा। इसके बाद दूसरा शुभ समय दोपहर 12:23 बजे से 2:00 बजे तक रहेगा। बहनें इन दोनों में से अपनी सुविधा के अनुसार शुभ समय में भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं।
इस अवधि में बहनें विधि-विधान से भाई को तिलक कर उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं। इसके बाद भाई-बहन एक-दूसरे का मुंह मीठा कर पर्व की खुशियां साझा करेंगे।
मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में बांधा गया रक्षा सूत्र भाई की सुख-समृद्धि, आरोग्य और दीर्घायु की कामना का प्रतीक होता है। यही वजह है कि रक्षाबंधन के दिन शुभ समय का विशेष महत्व माना जाता है।
रक्षाबंधन पर अक्सर भद्रा के समय को लेकर लोगों में संशय रहता है। इस बार ज्योतिषीय गणना के अनुसार भद्रा 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी। ऐसे में 28 अगस्त को राखी बांधने के दौरान भद्रा का व्यवधान नहीं रहेगा।
यही कारण है कि बहनें 28 अगस्त की सुबह निर्धारित शुभ मुहूर्त में निश्चिंत होकर भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।
रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। इस पर्व से जुड़ी कई पौराणिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं।

महाभारत से जुड़े एक प्रसिद्ध प्रसंग के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपने वस्त्र का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। मान्यता है कि इसके बाद श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का संकल्प लिया। इसी कथा को रक्षा सूत्र की भावना और भाई-बहन के बीच स्नेह एवं सुरक्षा के भाव से जोड़कर देखा जाता है।
रक्षा सूत्र के महापर्व पर राखी की थाली में क्या-क्या रखें ?

रक्षाबंधन पर पूजा की थाली को भी विशेष रूप से सजाया जाता है। बहनें इसमें रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रख सकती हैं। सबसे पहले भाई को तिलक लगाया जाता है, फिर उसकी कलाई पर राखी बांधकर मिठाई खिलाई जाती है। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसकी सदैव रक्षा और सम्मान का संकल्प लेता है।
कई परिवारों में राखी बांधने से पहले भगवान की पूजा की जाती है और रक्षा सूत्र को भगवान के चरणों में अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है।
सिर्फ राखी नहीं, रिश्तों को मजबूत करने का पर्व
समय के साथ रक्षाबंधन का स्वरूप भी व्यापक हुआ है। अब यह पर्व केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि परिवार में प्रेम, अपनापन और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने वाला अवसर बन चुका है।
दूर रहने वाली बहनें भाइयों को डाक या ऑनलाइन माध्यम से राखी भेज रही हैं, तो कई भाई भी इस खास दिन बहनों से मिलने के लिए दूर-दराज से घर पहुंचते हैं। ऐसे में रक्षाबंधन की सुबह एक बार फिर घर-आंगन में बचपन की यादें, हंसी-ठिठोली और रिश्तों की गर्माहट लौटती दिखाई देगी।
यानी इस बार 28 अगस्त की सुबह सिर्फ भाइयों की कलाइयों पर राखियां नहीं सजेंगी, बल्कि प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प से भाई-बहन का रिश्ता एक बार फिर भावनाओं के धागे में बंधेगा।
