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किसानों-मजदूरों की आवाज बनी भाकियू टिकैत, ज्ञापन भेज राष्ट्रपति से की कई मांगें।

एमएसपी कानूनी गारंटी, कर्जमाफी समेत रखीं कई मांगें।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ और अगस्त क्रांति के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के समर्थन में किसानों-मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन जिलाधिकारी/उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति तक पहुंचाने की अपील की गई।
ज्ञापन में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते का विरोध करते हुए सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की गई। साथ ही किसानों की व्यापक कर्जमाफी, किसान आत्महत्या पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा तथा चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग उठाई गई।
किसानों और मजदूरों के हित में मनरेगा को मजबूत कर साल में 200 दिन रोजगार और न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी, बिजली व खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रस्तावित बदलाव वापस लेने तथा जबरन भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
इसके अलावा भारतीय खाद्य निगम को मजबूत करने, कृषि-खाद्य क्षेत्र में FDI पर रोक, उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सार्वजनिक फसल एवं पशुधन बीमा योजना लागू करने, हर खेत तक सिंचाई पहुंचाने तथा 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को 10 हजार रुपये मासिक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने की मांग की गई।

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