◆ जनकल्याणकारी योजनाओं में लापरवाही पर डीएम के निर्देश पर की गई कार्रवाई।
प्रवाह ब्यूरो
संभल। जुनावई ब्लॉक की 11 ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं और जनसुविधाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर की गई जांच के बाद 10 पंचायत सहायकों की सेवा समाप्त करने के आदेश जारी किए गए हैं। कार्रवाई के बाद पंचायत स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है।
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने जिला पंचायत राज अधिकारी गिरिश कुमार को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद संबंधित पंचायत सहायकों को नोटिस जारी कर 27 सितंबर तक एडीओ पंचायत के माध्यम से साक्ष्यों सहित जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया था। एडीओ पंचायत पंकज कुमार ने भावना, सुमन, नीरज, पिंकी रानी, पायल, पिंकी, सुनीता यादव, ऊषा, पंकज यादव, मोहित कुमार और संदीप यादव समेत 11 पंचायत सहायकों को नोटिस जारी किए थे। इन पर सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी सुविधाओं को पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए थे।
जांच के दौरान पंचायत सहायकों पर आय, जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र, फार्मर रजिस्ट्री, आयुष्मान कार्ड और फैमिली आईडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में लापरवाही के आरोप सामने आए। इसके अलावा निराश्रित, विधवा और वृद्धावस्था पेंशन, रेट्रोफिटिंग, शौचालय योजना, गजेटियर तथा मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री आवास योजनाओं के सत्यापन में भी अनियमितता पाए जाने की बात सामने आई।
वहीं कन्या सुमंगला योजना के ऑनलाइन आवेदन और सत्यापन में भी लापरवाही मिलने से प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। एडीओ पंचायत पंकज कुमार के अनुसार, लापरवाही बरतने वाले 10 ग्राम पंचायतों के पंचायत सहायकों की सेवा समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
कार्रवाई की प्रक्रिया के दौरान अहरौला नवाजी गांव की एक पंचायत सहायिका ने निर्धारित समय में अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया, जबकि शेष 10 पंचायत सहायकों ने तय समय सीमा में जवाब नहीं दिया। जवाब नहीं मिलने पर विभागीय अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कार्रवाई आगे बढ़ाई। संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि आगामी तीन दिन के अंदर अर्थात 6 अक्टूबर तक पंचायत सहायकों की सेवा समाप्ति की कार्रवाई पूरी कराई जाए।
प्रशासन की इस कार्रवाई से साफ संकेत है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और पात्र लाभार्थियों को सरकारी सुविधाओं से वंचित करने की शिकायतों को अब गंभीरता से लिया जाएगा।
