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बारिश भी नहीं डिगा सकी आस्था, राजघाट गंगाघाट पर पितरों के तर्पण को उमड़ी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़।

◆ सुबह चार बजे से जुटने लगे श्रद्धालु, कुश, काले तिल, जौ और गंगाजल से पितरों को जलदान कर, की सुख समृद्धि की कामना।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। पितृपक्ष पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रथम दिन शनिवार को राजघाट गंगाघाट पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के सुबह से ही गंगाघाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई, जो देर शाम तक लगातार बढ़ती रही। तेज बारिश और खराब मौसम भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सका। लोगों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण-पिंडदान किया।
सुबह करीब चार बजे से ही राजघाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। बबराला, गुन्नौर, चंदौसी, बहजोई, अलीगढ़, अतरौली, संभल, बदायूं सहित आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में लोग राजघाट पहुंचे। श्रद्धालु निजी वाहनों के अलावा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और बसों से भी गंगाघाट पहुंचे।

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गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पुरोहितों के सानिध्य में विधि-विधान से पितरों का तर्पण किया। कई श्रद्धालुओं ने हाथों में कुश की अंगूठी धारण कर काले तिल, जौ और गंगाजल के साथ अपने पितरों को जल अर्पित किया। इस दौरान घाट पर जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान और मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
पितरों की शांति और सुख-समृद्धि की कामना
मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनकी आत्मा की शांति तथा परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। घाट पर उमड़ी भीड़ में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भी बड़ी संख्या रही।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। घाट पर पुलिसकर्मी लगातार मुस्तैद रहे और भीड़ को व्यवस्थित करने के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर नजर बनाए रखी। गोताखोरों और पुलिस बल की तैनाती के चलते गंगाघाट पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखा गया।

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