◆ अब ₹9 हजार प्रतिमाह मिलेगा मानदेय, मुकदमे होंगे वापस; हटाए गए पंचायत सहायकों की होगी बहाली।
◆ प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा लाभ, परिवारों को कैशलेस सुविधा देने की भी घोषणा।
प्रवाह ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत पंचायत सहायकों के लिए बुधवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठा रहे पंचायत सहायकों के आंदोलन का असर आखिरकार सरकार के फैसले के रूप में सामने आया है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने घोषणा की कि प्रदेश के पंचायत सहायकों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 9 हजार रुपये किया जाएगा।
सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को सीधा लाभ मिलने की बात कही गई है। इतना ही नहीं, आंदोलन के दौरान पंचायत सहायकों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने और कार्रवाई के चलते सेवा से हटाए गए सहायकों को पुनः बहाल करने का भी निर्णय लिया गया है।
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि पंचायत सहायकों की मांगें जायज थीं। उन्होंने कहा कि 24 तारीख से धरने पर बैठे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से लखनऊ पहुंचने के बाद बातचीत की गई। इसके बाद उनकी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विस्तार से चर्चा हुई।
मंत्री के अनुसार, बैठक के बाद सरकार ने पंचायत सहायकों के मानदेय को बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह करने की स्वीकृति प्रदान कर दी।

राजभर ने कहा कि सरकार की ओर से पहले 8 हजार रुपये के मानदेय पर सहमति बनाने का प्रयास था, लेकिन पंचायत सहायकों को मुख्यमंत्री से वार्ता कर समाधान का आश्वासन दिया गया था। इसी आश्वासन के अनुरूप मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद मानदेय को 9 हजार रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया गया।
आंदोलन के दौरान कई पंचायत सहायकों पर कार्रवाई की गई थी। इसे लेकर भी सरकार ने राहत देने का निर्णय लिया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया की जाएगी। वहीं, कार्रवाई के कारण जिन पंचायत सहायकों को सेवा से हटा दिया गया था, उन्हें पुनः सेवा में बहाल किए जाने की घोषणा की गई है।
मानदेय बढ़ाने के साथ सरकार ने पंचायत सहायकों के परिवारों के लिए भी अहम घोषणा की है। प्रत्येक पंचायत सहायक के परिवार को कैशलेस सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, इस सुविधा का वास्तविक दायरा, पात्रता और इसे लागू करने की प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी सरकारी आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बता दें कि ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक और डिजिटल कार्यों को गति देने के उद्देश्य से पंचायत सहायकों की नियुक्ति की गई थी। इन्हें पंचायत सहायक/अकाउंटेंट-कम-डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।
ग्राम पंचायतों में डेटा एंट्री, ऑनलाइन आवेदन एवं विभिन्न डिजिटल प्रक्रियाओं के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों में भी पंचायत सहायकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से आगे बढ़ाने में भी ये कर्मचारी अहम कड़ी के रूप में काम करते हैं।
कुल मिलाकर, पंचायत सहायकों के आंदोलन के बाद सरकार की ओर से मानदेय में बढ़ोतरी, मुकदमों की वापसी और सेवा से हटाए गए सहायकों की बहाली की घोषणा को आंदोलनरत पंचायत सहायकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
