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श्रीराम राज्याभिषेक के साथ सात दिवसीय रामकथा का भव्य समापन।

◆ प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा पंडाल।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। बुधवार को संभल के कृतियां गांव में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के बीच भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लंका विजय, रावण वध, प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी और भव्य राज्याभिषेक के भावपूर्ण प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा पंडाल भक्ति गीतों और जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कथा के विश्राम दिवस पर कासगंज से पधारे प्रख्यात कथावाचक प्रेममूर्ति पंकज मिश्र ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का संगीतमय वर्णन किया।

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उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया और लंका का राजपाट धर्मनिष्ठ विभीषण को सौंपकर न्याय, सुशासन और मर्यादा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि रावण जैसा शक्तिशाली और विद्वान भी अहंकार, अन्याय और अधर्म के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादा का अनुपम उदाहरण है, जो हर व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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कथावाचक ने जब लंका विजय के बाद माता सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान से प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी का प्रसंग सुनाया, तो श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उन्होंने बताया कि प्रभु के आगमन की सूचना मिलते ही अयोध्या नगरी हर्ष और उल्लास से भर गई। अयोध्यावासियों ने घर-घर दीप जलाकर अपने आराध्य का स्वागत किया। इसी परंपरा की स्मृति में दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस प्रसंग के दौरान पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। सात दिवसीय कथा के समापन पर प्रभु श्रीराम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक की भव्य झांकी सजाई गई।

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आकर्षक सज्जा और भक्तिमय वातावरण के बीच प्रस्तुत झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस प्रसंग के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श शासन, न्यायप्रियता, प्रजा के प्रति समर्पण और लोककल्याण की भावना को रेखांकित किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वरूप की आरती उतारकर क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

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कार्यक्रम आयोजक धर्मेंद्र ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सहयोगियों, श्रद्धालुओं और ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा जैसे धार्मिक आयोजन आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के साथ समाज में प्रेम, सद्भाव, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। भगवान श्रीराम के आदर्श हमें परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने की प्रेरणा देते हैं।
सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन का समापन श्रद्धा और उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ। प्रभु श्रीराम के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने कथा को भावपूर्ण विदाई दी।

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