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अयोध्या के बाद अब संभल के हरि बाबा बांध धाम में चंदे के हिसाब-किताब पर उठे सवाल?

समिति सदस्य ने लगाए गबन के कथित गंभीर आरोप, बोले—वर्षों से नहीं मिला आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। संभल की गुन्नौर तहसील क्षेत्र के गवां में स्थित प्रसिद्ध श्री हरि बाबा बांध धाम में चंदे और आय-व्यय के हिसाब-किताब को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ट्रस्ट से जुड़े समिति सदस्य राघवेंद्र कुमार ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए चंदे के धन में कथित अनियमितता और गबन के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि लंबे समय से ट्रस्ट की आय और खर्च का समुचित लेखा-जोखा सदस्यों के सामने नहीं रखा गया।
राघवेंद्र कुमार के अनुसार, बांध धाम की आय के कई स्रोत हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर की करीब 300 से 400 बीघा कृषि भूमि से गेहूं, गन्ना आदि की उपज होती है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्र से चंदे के रूप में बड़ी मात्रा में गेहूं भी एकत्रित किया जाता है। उनका दावा है कि क्षेत्र से करीब चार से पांच हजार कुंतल गेहूं चंदे के रूप में आने की बात सामने आती है।
समिति सदस्य ने आगे आरोप लगाया कि मंदिर की गुल्लक से प्रतिवर्ष करीब 14-15 लाख रुपये निकलते हैं, जबकि रसीदों के माध्यम से होने वाली आय तथा अन्य स्रोतों का पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि आय के तमाम स्रोत होने के बावजूद विगत वर्षों में ट्रस्ट की संपत्ति और आय बढ़ने के बजाय कम होती दिखाई दे रही है।

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राघवेंद्र कुमार का दावा है कि करीब एक वर्ष पहले ट्रस्ट का लेखा-जोखा लगभग 65 लाख रुपये बताया गया था, जो बढ़ने के बजाय घटकर करीब 44 लाख रुपये रह गया। उन्होंने इस अंतर पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और आय-व्यय का विस्तृत ऑडिट कराने की मांग की है।
समिति सदस्य ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर और फर्जी दस्तावेज तैयार कर धन के दुरुपयोग का खेल लंबे समय से चल रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनका कहना है कि यदि रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

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बता दें कि श्री हरि बाबा बांध धाम संभल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर और ट्रस्ट की आय-व्यय व्यवस्था से जुड़े आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है। समिति सदस्य ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
अब देखने वाली बात होगी कि इन आरोपों पर ट्रस्ट प्रबंधन क्या स्पष्टीकरण देता है और संबंधित प्रशासनिक अथवा जांच एजेंसी द्वारा रिकॉर्ड की जांच कराए जाने पर वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

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