◆ अल्लापुर चमारी में मचा कोहराम, किसी ने भाई खोया तो किसी के सिर से उठा माता-पिता का साया
प्रवाह ब्यूरो
बदायूं। कल तक जिन गलियों में बच्चों की खिलखिलाहट गूंजती थी, सोमवार को वहीं सिर्फ चीखें सुनाई दे रही थीं। जिन घरों में सुबह चूल्हे जलते थे, वहां राख ठंडी पड़ी थी। किसी मां की आंखें दरवाजे पर अपनों के लौटने का इंतजार कर रही थीं तो किसी घर में यह खबर पहुंच चुकी थी कि अब उनका अपना कभी वापस नहीं आएगा।
बागपत में हुए भीषण सड़क हादसे ने बदायूं के अल्लापुर चमारी गांव को ऐसा जख्म दिया कि पूरा गांव एक साथ शोक में डूब गया। एक पिकअप के हादसे ने 13 परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। किसी ने अपना भाई खोया, किसी ने जीवनसाथी तो किसी बेटी के सिर से एक साथ मां-बाप का साया उठ गया।
हादसे की खबर गांव पहुंचते ही मानो समय थम गया। जिसको जहां खबर मिली, वह वहीं से बागपत की ओर दौड़ पड़ा। खेत-खलिहान, घर और रोजमर्रा के काम सब पीछे छूट गए। गांव में रह गए लोगों के हिस्से में सिर्फ इंतजार, आंसू और अपनों को खोने का दर्द आया।

सोमवार को अल्लापुर चमारी की गलियां बता रही थीं कि हादसे का दर्द सिर्फ उन 13 परिवारों तक सीमित नहीं है, पूरे गांव ने अपने लोगों को खोया है।
करीब 1900 की आबादी वाले इस गांव से लगभग 100 लोग तीन पिकअप वाहनों में सवार होकर बागड़ यात्रा के लिए निकले थे। जाते समय किसी ने नहीं सोचा था कि धार्मिक यात्रा से लौटते वक्त एक पिकअप का पलटना कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगा।
हादसे की सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनों का हाल जानने के लिए बागपत रवाना होने लगे। कई परिवारों के लिए वह सफर सिर्फ घटनास्थल तक पहुंचने का नहीं, बल्कि जिंदगी की सबसे भयावह सच्चाई से सामना करने का सफर बन गया।
रात के समय गांव के कई पशुपालक पशुओं के लिए चारा काट रहे थे। तभी हादसे की सूचना मिली। किसी ने मशीन में फंसा चारा निकालने तक की जहमत नहीं उठाई। काम वहीं छोड़ा और सीधे बागपत के लिए निकल पड़े। उस समय गांव के लोगों के लिए सबसे जरूरी सिर्फ एक चीज थी अपनों को देखना।
सोमवार शाम एसडीएम समेत प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे। बड़ी संख्या में ग्रामीण पहले ही बागपत जा चुके थे। पीछे रह गई थीं सूनी गलियां और वे घर, जहां से रह-रहकर रोने की आवाजें आ रही थीं।

कहीं महिलाएं बिलख रही थीं, कहीं बच्चे सहमे बैठे थे और कहीं रिश्तेदार परिवार के लोगों को संभाल रहे थे। प्रशासनिक अधिकारी भी गांव का माहौल देखकर स्तब्ध रह गए।
साधु सिंह के घर का दृश्य सबसे मार्मिक था। हादसे में साधु सिंह और उनकी पत्नी दोनों की मौत ने बेटी बेगा यादव को भीतर तक तोड़ दिया। कभी वह फूट-फूटकर रोने लगती तो कभी सदमे में बेसुध हो जाती। आसपास की महिलाएं उसे संभालती रहीं, लेकिन माता-पिता को एक साथ खोने का दर्द उसके आंसुओं में साफ दिखाई दे रहा था।
प्रेम सिंह के परिवार में भी मातम का यही आलम था। अपनों को खोने का सदमा इतना गहरा था कि परिवार के लोग बार-बार बेसुध हो रहे थे। रिश्तेदार और ग्रामीण उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इस दुख के सामने हर सांत्वना छोटी पड़ रही थी। अल्लापुर चमारी में सोमवार को कई घरों में चूल्हे नहीं जले। जिन गलियों में रोज जिंदगी दौड़ती नजर आती थी, वहां सन्नाटा पसरा रहा। बागपत का यह हादसा 13 जिंदगियां अपने साथ ले गया, लेकिन पीछे छोड़ गया कई परिवारों के लिए ऐसा खालीपन, जिसे शायद वक्त भी पूरी तरह नहीं भर पाएगा।
