Home » बबराला में 24 से 26 अक्टूबर तक गूंजेगा वैदिक संस्कृति का संदेश, जुटेंगे देशभर के संत-महात्मा।

बबराला में 24 से 26 अक्टूबर तक गूंजेगा वैदिक संस्कृति का संदेश, जुटेंगे देशभर के संत-महात्मा।

◆ तीन दिवसीय प्रांतीय आर्य महासम्मेलन की तैयारियां तेज, डीएम और एसपी ने कार्यक्रम स्थल का किया निरीक्षण।

◆ 51 कुंडीय विश्व कल्याण यज्ञ और वेदोपदेश रहेगा प्रमुख आकर्षण, योगगुरु स्वामी रामदेव सहित कई विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना।

प्रवाह ब्यूरो
संभल। वैदिक संस्कृति के संरक्षण, भारतीय संस्कारों के संवर्धन और आर्य समाज की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से संभल जनपद के बबराला में 24, 25 और 26 अक्टूबर को तीन दिवसीय प्रांतीय आर्य महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। आर्य प्रतिनिधि सभा, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में होने वाले इस भव्य आयोजन में देशभर के संत-महात्माओं, विद्वानों, आर्य समाज के प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। महासम्मेलन में वैदिक ज्ञान, सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में आर्य समाज की भूमिका पर मंथन होगा। वहीं, 51 कुंडीय विश्व कल्याण यज्ञ और वेदोपदेश आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहेंगे।
महासम्मेलन को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए शनिवार को जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक विकास चंद्र त्रिपाठी ने बबराला स्थित बाबूराम सिंह भाय सिंह डिग्री कॉलेज में कार्यक्रम स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए सुरक्षा, यातायात संचालन और भीड़ प्रबंधन सहित विभिन्न आवश्यक बिंदुओं पर जानकारी ली। इस दौरान महासम्मेलन के अध्यक्ष दयाशंकर आर्य भी मौजूद रहे। जहां उन्होंने अधिकारियों को आयोजन की तैयारियों और प्रस्तावित कार्यक्रमों के संबंध में जानकारी दी।

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महासम्मेलन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने तथा विशिष्ट अतिथियों की प्रस्तावित सहभागिता को देखते हुए प्रशासन व्यवस्थाओं को लेकर सतर्क है। श्रद्धालुओं और अतिथियों की सुरक्षा के साथ यातायात व्यवस्था, पार्किंग, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि तीनों दिन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
तीन दिवसीय महासम्मेलन में योगगुरु स्वामी रामदेव जी महाराज को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, एमडीएच ग्रुप के चेयरमैन राजीव गुलाटी सहित आर्य समाज से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों और संत-महात्माओं के शामिल होने की स्वीकृति मिलने की जानकारी दी गई है। विशिष्ट अतिथियों की प्रस्तावित सहभागिता से आयोजन को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

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महासम्मेलन के दौरान आर्य समाज की शिक्षाओं, वैदिक परंपराओं, शिक्षा और संस्कारों के महत्व, सामाजिक समरसता तथा राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका जैसे विषयों पर विचार रखे जाएंगे। आयोजकों का प्रयास है कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ वैचारिक विमर्श के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी प्रोत्साहित किया जाए।
महासम्मेलन के अंतर्गत 51 कुंडीय विश्व कल्याण यज्ञ एवं वेदोपदेश का विशेष आयोजन किया जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, प्रतिदिन सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक यज्ञ और वेदोपदेश संपन्न होंगे। इसके साथ ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से वैदिक ज्ञान, भारतीय जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं का संदेश दिया जाएगा।

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यज्ञ और वैदिक अनुष्ठानों के जरिए विश्व कल्याण, सद्भाव और लोकमंगल की भावना को प्रमुखता दी जाएगी। वहीं, वेदोपदेश के माध्यम से लोगों को वैदिक विचारधारा, जीवन में नैतिक मूल्यों के महत्व और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
महासम्मेलन का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, शिक्षा के प्रसार, संस्कारों के संवर्धन और समाज में एकता की भावना मजबूत करने का संदेश भी दिया जाएगा। आर्य समाज की विचारधारा के अनुरूप वैचारिक जागरण और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने पर विशेष बल रहेगा।
आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जोड़ने के साथ ही समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तीन दिनों तक बबराला में धार्मिक, आध्यात्मिक और वैचारिक गतिविधियों का विशेष वातावरण बनने की उम्मीद है। महासम्मेलन को सफल बनाने के लिए आयोजकों की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। आर्य समाज के पदाधिकारियों, धर्मप्रेमियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय नागरिकों से आयोजन में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने की अपील की गई है।

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