◆ सहायक रजिस्ट्रार की जांच में बड़ा खुलासा; फर्जी दस्तावेजों के आरोपों की पुष्टि, अब चढ़ावे, खर्च और वित्तीय लेनदेन की पारदर्शिता भी की भी होगी पड़ताल।
◆ विश्व प्रवाह की खबरों के बाद जिलाधिकारी ने गठित की थी तीन सदस्यीय जांच समिति; अब जांच के बाद निरस्त हुआ फर्जी मिला नवीनीकरण।
प्रवाह ब्यूरो
संभल। जनपद के गवां क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध श्री हरिबाबा बांध धाम ट्रस्ट से जुड़ा मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। ट्रस्ट के नवीनीकरण को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच मुरादाबाद स्थित सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स कार्यालय की जांच में नवीनीकरण प्रक्रिया फर्जी पाए जाने की पुष्टि हुई है। इसके बाद सहायक रजिस्ट्रार आनंद विक्रम सिंह ने ट्रस्ट का नवीनीकरण निरस्त कर दिया है। साथ ही समिति से जुड़े अभिलेख और दस्तावेज भी तलब किए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट पर लगे आरोपों को लेकर सबसे पहले विश्व प्रवाह ने संज्ञान लेते हुए फर्जी नवीनीकरण और चंदे में कथित गड़बड़ी से जुड़ी आरोपों की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबरों के सामने आने के बाद संभल जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद सोमवार को ट्रस्ट के नवीनीकरण को निरस्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया।

शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि ट्रस्ट के नवीनीकरण के दौरान फर्जी आधार कार्ड, शपथपत्र और अन्य दस्तावेजों का उपयोग किया गया। इस संबंध में सीएम पोर्टल, जिलाधिकारी संभल और मुरादाबाद के सहायक रजिस्ट्रार कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके आधार पर नवीनीकरण को रद्द करने की कार्रवाई की गई।
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू ट्रस्ट के वित्तीय संचालन से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं ने वर्ष 2021 से 2025 तक के आय-व्यय का विस्तृत ऑडिट कराने की मांग उठाई थी। अब ऑडिट की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है, जिससे ट्रस्ट की वास्तविक आय, व्यय और वित्तीय प्रबंधन की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायतकर्ताओं ने ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि धाम की गुल्लक में प्रत्येक माह लगभग 12 से 13 लाख रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है। यह गुल्लक हर माह की पांच तारीख को खोली जाती है और इसी धनराशि से कर्मचारियों के मानदेय, लंगर, गोशाला तथा अन्य व्यवस्थाओं का संचालन किया जाता है।
हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन लेनदेन में पारदर्शिता का अभाव रहा है। उनका कहना है कि ऑडिट के बाद ही वास्तविक वित्तीय स्थिति और खर्च का पूरा ब्यौरा सामने आ सकेगा।

जांच के दौरान ट्रस्ट के सदस्य अवधेश कुमार सिंह समेत नौ सदस्यों के दस्तावेजों का भी परीक्षण किया गया। सीएम पोर्टल और प्रशासन को भेजी गई शिकायतों के आधार पर दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, जिसमें नवीनीकरण प्रक्रिया में अनियमितताओं की पुष्टि हुई।
इस मामले में जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल की ओर से एडीएम स्तर पर जांच के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। ऐसे में अब प्रशासनिक जांच के साथ-साथ वित्तीय ऑडिट पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
श्री हरिबाबा बांध धाम ट्रस्ट के नवीनीकरण के निरस्त होने के बाद यह मामला केवल दस्तावेजी अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था, आय-व्यय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पारदर्शिता भी जांच के दायरे में आ गई है। आने वाले दिनों में ऑडिट और प्रशासनिक जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।
